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21 Jan 2026, Wed

अब झारखंड का बजट बनेगा जनता की मर्जी से, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया ‘अबुआ दिशोम’ पोर्टल

अब झारखंड का बजट बनेगा जनता की मर्जी से, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया ‘अबुआ दिशोम’ पोर्टल

अब झारखंड का बजट बनेगा जनता की मर्जी से, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया ‘अबुआ दिशोम’ पोर्टल

झारखंड में लोकतांत्रिक शासन और जनभागीदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘अबुआ दिशोम पोर्टल’ लॉन्च करते हुए घोषणा की कि अब झारखंड का बजट केवल सरकारी फाइलों और विभागीय बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे जनता की राय और सुझावों से तैयार किया जाएगा

यह पहल झारखंड को देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल करती है, जहां Participatory Budgeting यानी सहभागितापूर्ण बजट निर्माण को संस्थागत रूप दिया जा रहा है।


क्या है ‘अबुआ दिशोम’ पोर्टल?

अबुआ दिशोम झारखंड सरकार का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से राज्य के नागरिक—

  • बजट से जुड़े सुझाव दे सकते हैं

  • स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को दर्ज कर सकते हैं

  • विकास प्राथमिकताओं पर अपनी राय रख सकते हैं

‘अबुआ दिशोम’ का अर्थ है “हमारा झारखंड”, जो इस पोर्टल की भावना को स्पष्ट करता है—सरकार और जनता मिलकर राज्य के भविष्य की दिशा तय करें।


जनता की भागीदारी से बनेगा बजट

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पोर्टल लॉन्च के दौरान कहा कि—

“सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब वे जनता की वास्तविक जरूरतों पर आधारित हों। अबुआ दिशोम पोर्टल जनता को सीधे बजट प्रक्रिया से जोड़ने का माध्यम बनेगा।”

इस पहल के तहत—

  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग

  • छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं और युवा

  • सामाजिक संगठन और विशेषज्ञ

अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकेंगे। इससे बजट जमीनी हकीकत के ज्यादा करीब होगा।


क्यों जरूरी थी यह पहल?

झारखंड जैसे राज्य में—

  • आदिवासी बहुल क्षेत्र

  • भौगोलिक और सामाजिक विविधता

  • विकास की असमान चुनौतियां

मौजूद हैं। अक्सर यह देखा गया है कि स्थानीय जरूरतें नीति निर्माण में पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं हो पातीं। अबुआ दिशोम पोर्टल इस खाई को पाटने का प्रयास है।

यह पहल यह सुनिश्चित करेगी कि—

  • दूरदराज के गांवों की आवाज़ भी सुनी जाए

  • स्थानीय समस्याएं राज्य स्तरीय प्राथमिकता बनें

  • योजनाएं केवल कागज़ी नहीं, बल्कि व्यवहारिक हों


बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। नागरिक यह महसूस करेंगे कि—

  • उनकी राय का महत्व है

  • सरकार उनकी बात सुन रही है

  • बजट उनके जीवन को सीधे प्रभावित करने वाला दस्तावेज है

यह विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें सरकार और जनता के बीच भरोसे की खाई को कम करती हैं


आदिवासी सोच और आधुनिक तकनीक का संगम

‘अबुआ दिशोम’ नाम अपने आप में झारखंड की आदिवासी पहचान और सांस्कृतिक आत्मसम्मान को दर्शाता है। यह पहल दिखाती है कि—

  • पारंपरिक सोच

  • सामुदायिक निर्णय प्रक्रिया

  • और आधुनिक डिजिटल तकनीक

एक साथ मिलकर शासन को अधिक मानवीय और समावेशी बना सकती हैं।


अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है झारखंड

नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो झारखंड का यह मॉडल—

  • अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा

  • केंद्र सरकार की नीतियों में भी जनभागीदारी बढ़ाने का आधार बनेगा

  • लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूती देगा

पहले भी दुनिया के कई देशों में Participatory Budgeting के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। झारखंड अब इस दिशा में भारत का अग्रणी राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है।


आम नागरिकों को क्या होगा फायदा?

अबुआ दिशोम पोर्टल से आम जनता को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे—

  • स्थानीय समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाने का मंच

  • विकास कार्यों में प्राथमिकता तय करने में भूमिका

  • बजट को समझने और उस पर संवाद करने का अवसर

इससे नागरिक केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्माण के साझेदार बनेंगे।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • ‘अबुआ दिशोम’ पोर्टल: झारखंड सरकार की पहल

  • उद्देश्य: जनता की भागीदारी से बजट निर्माण

  • लॉन्चकर्ता: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

  • अवधारणा: Participatory Budgeting

  • अर्थ: ‘अबुआ दिशोम’ = हमारा झारखंड


निष्कर्ष

अबुआ दिशोम पोर्टल झारखंड के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह पहल दिखाती है कि शासन तभी प्रभावी होता है, जब जनता केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बने।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यह पहल न केवल बजट निर्माण को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाएगी, बल्कि झारखंड को जन-आधारित शासन का एक मजबूत उदाहरण भी बनाएगी। आने वाले वर्षों में यह प्रयोग यह तय करेगा कि लोकतंत्र कितनी गहराई तक जनता के जीवन से जुड़ सकता है।

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