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20 Jan 2026, Tue

ग्रीन स्टील पर टाटा स्टील का बड़ा दांव: झारखंड में ₹11,000 करोड़ का निवेश

ग्रीन स्टील पर टाटा स्टील का बड़ा दांव: झारखंड में ₹11,000 करोड़ का निवेश

भारत के इस्पात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में टाटा स्टील ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ग्रीन स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए झारखंड में लगभग ₹11,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश न केवल राज्य के औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धता और हरित औद्योगिक संक्रमण (Green Transition) की रणनीति में भी अहम भूमिका निभाएगा।

टाटा स्टील का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर इस्पात उद्योग को डीकार्बोनाइजेशन और स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए तीव्र दबाव का सामना करना पड़ रहा है।


खबरों में क्यों?

  • टाटा स्टील ने झारखंड में ₹11,000 करोड़ के निवेश की योजना की घोषणा की।

  • यह निवेश ग्रीन स्टील उत्पादन और स्वच्छ इस्पात प्रौद्योगिकी के विस्तार पर केंद्रित होगा।

  • इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा दक्षता में सुधार और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

यह परियोजना भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्य और हरित औद्योगिक नीति के अनुरूप मानी जा रही है।


ग्रीन स्टील क्या है?

ग्रीन स्टील उस इस्पात को कहा जाता है, जिसका उत्पादन:

  • बहुत कम या शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ किया जाता है,

  • कोयले आधारित ब्लास्ट फर्नेस की जगह

    • हाइड्रोजन आधारित रिडक्शन,

    • इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस,

    • या नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित तकनीकों का उपयोग करता है।

पारंपरिक इस्पात उद्योग:

  • वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 7–8 प्रतिशत योगदान करता है।

इसलिए ग्रीन स्टील:

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने,

  • स्वच्छ औद्योगिक भविष्य,

  • और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला
    के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


झारखंड में निवेश का महत्व

टाटा स्टील का झारखंड में निवेश कई दृष्टियों से रणनीतिक है:

  1. औद्योगिक आधार को मजबूती
    झारखंड पहले से ही खनिज संसाधनों और इस्पात उद्योग का प्रमुख केंद्र है।
    नया निवेश राज्य को ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर सकता है।

  2. रोजगार सृजन
    परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से

    • हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे,

    • स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा।

  3. क्षेत्रीय विकास
    इससे

    • अवसंरचना,

    • लॉजिस्टिक्स,

    • और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।


टाटा स्टील की हरित रणनीति

टाटा स्टील पहले से ही सतत विकास और डीकार्बोनाइजेशन को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बना चुकी है।

कंपनी के प्रमुख लक्ष्य:

  • 2045 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन

  • नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना

  • ऊर्जा दक्षता में निरंतर सुधार

  • हाइड्रोजन आधारित इस्पात तकनीक का परीक्षण

झारखंड में प्रस्तावित निवेश में शामिल हो सकते हैं:

  • लो-कार्बन ब्लास्ट फर्नेस अपग्रेडेशन

  • इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस का विस्तार

  • कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) तकनीक

  • ग्रीन हाइड्रोजन आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स


भारत के लिए रणनीतिक महत्व

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।
देश का लक्ष्य:

  • 2030 तक 300 मिलियन टन स्टील उत्पादन क्षमता

  • साथ ही कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में कमी

टाटा स्टील का यह निवेश:

  • भारत को ग्रीन स्टील के वैश्विक मानचित्र पर अग्रणी बना सकता है।

  • भविष्य में

    • यूरोप,

    • जापान,

    • और अन्य विकसित देशों में
      ग्रीन स्टील निर्यात के अवसर खोल सकता है।

यह भारत की हरित औद्योगिक कूटनीति को भी मजबूत करता है।


वैश्विक संदर्भ: ग्रीन स्टील की दौड़

आज दुनिया के कई देश ग्रीन स्टील तकनीक में निवेश कर रहे हैं:

  • स्वीडन का HYBRIT प्रोजेक्ट

  • जर्मनी और जापान के हाइड्रोजन स्टील प्लांट

  • यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM)

इन नीतियों के चलते:

  • उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले स्टील पर

    • भविष्य में कार्बन टैक्स लग सकता है।

ऐसे में टाटा स्टील का यह कदम भारत के इस्पात उद्योग को
भविष्य के वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में अग्रिम तैयारी है।


पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव

ग्रीन स्टील परियोजना से:

  • वायु प्रदूषण में कमी

  • जल और ऊर्जा की बचत

  • आसपास के क्षेत्रों में

    • बेहतर स्वास्थ्य स्थितियाँ,

    • कम पर्यावरणीय जोखिम

इसके साथ ही,
कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत:

  • कौशल विकास,

  • शिक्षा,

  • और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण
    की पहलें भी तेज होने की संभावना है।


चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालाँकि ग्रीन स्टील की राह आसान नहीं है:

  • हाइड्रोजन तकनीक अभी भी महंगी है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति एक चुनौती है।

  • प्रारंभिक निवेश लागत बहुत अधिक होती है।

लेकिन दीर्घकाल में:

  • कार्बन टैक्स से बचाव,

  • ब्रांड वैल्यू में वृद्धि,

  • और वैश्विक बाजार तक आसान पहुँच
    इस निवेश को रणनीतिक रूप से लाभकारी बनाते हैं।


निष्कर्ष

झारखंड में ₹11,000 करोड़ का टाटा स्टील निवेश केवल एक औद्योगिक विस्तार नहीं, बल्कि भारत के हरित औद्योगिक भविष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

यह परियोजना:

  • राज्य के विकास,

  • रोजगार सृजन,

  • पर्यावरण संरक्षण,

  • और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
    — सभी मोर्चों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी।

ग्रीन स्टील के क्षेत्र में टाटा स्टील का यह बड़ा दांव आने वाले वर्षों में भारत को स्वच्छ, टिकाऊ और जिम्मेदार औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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