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21 Jan 2026, Wed

घाटशिला उपचुनाव 2025: बाबूलाल मरांडी का हमला — “लूट, भ्रष्टाचार की पोषक हेमंत सरकार के खिलाफ जनता करेगी वोट”

घाटशिला उपचुनाव 2025: बाबूलाल मरांडी का हमला — “लूट, भ्रष्टाचार की पोषक हेमंत सरकार के खिलाफ जनता करेगी वोट”

झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर, 2025 को होने वाले उपचुनाव ने राज्य की सियासी गर्मी को बढ़ा दिया है। बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही यह उपचुनाव भी राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों ने एनडीए के तहत चुनाव जीतने की रणनीति बनाने में तेजी दिखाई है।


🏛️ एनडीए की तैयारी और बैठक

रांची में मंगलवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता में एनडीए के घटक दलों की बैठक हुई। इस बैठक में:

  • झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को चुनौती देने की रणनीति तय की गई।

  • आगामी उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा हुई।

बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कहा कि घाटशिला की जनता हेमंत सरकार की वादाखिलाफी और विकासहीन नीतियों से काफी नाराज है।


⚠️ बाबूलाल मरांडी का हमला हेमंत सरकार पर

मरांडी ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि:

  • पिछले 6 वर्षों में राज्य का विकास ठप हो गया है।

  • जनता को केवल लूट, भ्रष्टाचार, दलाली और माफियागिरी दिखाई दे रही है।

  • बालू, पत्थर और जमीन की लूट ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

उन्होंने बताया कि आम आदमी सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर है। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, अस्पतालों में दवाइयां और डॉक्टरों की कमी है। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार आम बात हो गया है और बिना पैसे के कोई काम नहीं होता।


👮‍♂️ कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी पर चिंता

बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि:

  • जनता राज्य की राजधानी में भी सुरक्षित नहीं महसूस करती।

  • राज्य के युवा नौकरी की प्रतीक्षा करते-करते थक चुके हैं।

  • यदि नियुक्तियां हो रही हैं तो नौकरी बिक रही है, जिससे सरकारी प्रणाली में अविश्वास बढ़ रहा है।

मरांडी ने यह भी कहा कि एनडीए जनता के बीच इन मुद्दों को लेकर जाएगी और मतदाता को सही विकल्प देने की दिशा में काम करेगी।


📈 आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो का समर्थन

ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) पार्टी के अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि एनडीए पूरी तरह एकजुट होकर उपचुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि:

  • राज्य सरकार की नाकामियों को चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।

  • एनडीए जनता से अपील करेगा कि भ्रष्टाचार और लूट-खसोट में लिप्त इस सरकार से राज्य को बचाया जाए।

  • हेमंत सरकार से जनता की नाराजगी इस उपचुनाव के परिणाम में स्पष्ट रूप से दिखेगी।


💡 जदयू और लोजपा का दृष्टिकोण

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो ने बैठक में लिए गए निर्णयों पर भरोसा जताते हुए कहा कि घाटशिला उपचुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित है।
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले आम चुनाव में भी एनडीए प्रत्याशी की स्थिति मजबूत रही थी और इस बार जनता पिछली कमियों को ध्यान में रखते हुए एनडीए प्रत्याशी को जीत दिलाएगी।


🗳️ एनडीए घटक दलों की रणनीति

बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख नेता और उनके दृष्टिकोण:

  • भाजपा: प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू

  • आजसू: अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो

  • जदयू: प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो

  • लोजपा: प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान

  • अन्य: विधायक जनार्दन पासवान और उमेश तिवारी

बैठक में तय किया गया कि एनडीए सभी घटक दल एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा, स्थानीय मुद्दों और जनता की नाराजगी को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।


🔑 मुख्य चुनावी मुद्दे

  1. भ्रष्टाचार और लूट: बालू, पत्थर, जमीन और सरकारी निधियों में गड़बड़ी।

  2. बुनियादी सुविधाओं की कमी: सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा की अपर्याप्त सुविधाएं।

  3. कानून-व्यवस्था: सुरक्षा में गिरावट और सरकारी प्रक्रियाओं में रिश्वतखोरी।

  4. बेरोजगारी: युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसरों की कमी।

  5. जनता की नाराजगी: हेमंत सरकार की नीतियों और विकासहीनता के खिलाफ मतदाता का गुस्सा।


📝 निष्कर्ष

घाटशिला उपचुनाव 2025 न केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव है, बल्कि यह झारखंड सरकार की लोकप्रियता और विपक्ष की ताकत का परीक्षण भी है। एनडीए की तैयारी, बाबूलाल मरांडी की नेतृत्व क्षमता और गठबंधन दलों की एकजुटता इस चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

इस उपचुनाव में जनता की सत्यनिष्ठ और विकास-केंद्रित सोच ही निर्णायक होगी। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती है, राजनीतिक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार में तेजी दिखाई दे रही है। घाटशिला का यह चुनाव राज्य की राजनीति में आगामी रणनीतियों और भविष्य के चुनावी रुझानों का संकेत देगा।

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