Donald Trump on Nuclear Weapons: चीन और रूस से की डीन्यूक्लियराइजेशन पर बात — आखिर क्या चाहते हैं ट्रंप?
दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरे से निकालने की नई पहल**
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े राज्य स्तरीय नियमों को रोकने वाले एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने बताया कि उन्होंने चीन और रूस के साथ हथियारों के निरस्त्रीकरण (Denuclearization) पर बातचीत की है।
उनका कहना है कि दुनिया आज जिस परमाणु खतरे के साए में जी रही है, उससे बाहर निकालने के लिए यह सबसे जरूरी कदम है।
🔴 ट्रंप का स्पष्ट संदेश: “परमाणु हथियारों का खतरा खत्म होना चाहिए”
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा:
“मैंने चीन से जिन मुद्दों पर बात की है, उनमें से एक है हथियारों का निरस्त्रीकरण। मैंने रूस से भी यह मुद्दा उठाया है। मेरा मानना है कि यह कदम न केवल हम चाहते हैं, बल्कि वे भी इसे करना चाहेंगे।”
ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि चीन और रूस के पास दुनिया में सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं, और यही वजह है कि पहले इन्हीं देशों के साथ बातचीत जरूरी है।
उनका दावा है कि यदि तीनों महाशक्तियाँ—अमेरिका, रूस और चीन—परमाणु हथियार कम करने पर सहमत हो जाती हैं, तो दुनिया की सुरक्षा स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हो सकता है।
🟡 रूस और चीन के साथ बातचीत क्यों महत्वपूर्ण?
आज दुनिया में करीब 13,000 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इनमें से:
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रूस के पास सबसे अधिक,
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अमेरिका दूसरे स्थान पर,
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चीन तेजी से अपनी संख्या बढ़ा रहा है।
इसके अलावा विश्व में:
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रूस–यूक्रेन युद्ध,
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चीन–अमेरिका तनाव,
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उत्तर कोरिया के निरंतर मिसाइल परीक्षण
ने वैश्विक सुरक्षा माहौल को और खतरनाक बना दिया है।
इसलिए ट्रंप का यह बयान वैश्विक परमाणु तनाव को कम करने की एक संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
🔥 पहले दिया था उलटा बयान — “दूसरे कर रहे हैं तो हम भी परीक्षण करेंगे!”
दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले ट्रंप ने ही यह बयान दिया था कि:
“जब रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका क्यों न करे?”
उन्होंने कहा था कि अमेरिका के पास सबसे उन्नत परमाणु हथियार हैं और यदि दूसरे देश परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका भी ऐसा करने की स्थिति में है।
उन्होंने यह भी कहा था कि:
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अमेरिकी टेस्ट साइट्स तैयार हैं,
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परीक्षण प्रक्रिया शुरू की जा सकती है,
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बस आधिकारिक घोषणा बाकी है।
यही विरोधाभासी बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है —
एक तरफ ट्रंप परीक्षण की बात करते हैं, दूसरी तरफ निरस्त्रीकरण पर बातचीत।
विशेषज्ञ इसे ट्रंप की “दोहरी रणनीति” के रूप में देख रहे हैं —
एक तरफ दबाव की राजनीति, दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत।
🔵 अमेरिका ने किया B61-12 न्यूक्लियर ग्रेविटी बम का परीक्षण
ट्रंप के बयान के बीच ही अमेरिका ने अपनी B61-12 न्यूक्लियर ग्रेविटी बम के महत्वपूर्ण फ्लाइट टेस्ट पूरे कर लिए हैं।
परीक्षण विवरण:
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19–21 अगस्त के बीच टोनोपा टेस्ट रेंज, नेवादा में परीक्षण
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F-35A स्टेल्थ जेट से निष्क्रिय मॉडल छोड़ा गया
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उद्देश्य: हथियार और विमान की परिचालन क्षमता की पुष्टि
यह परीक्षण दुनिया को यह संदेश देता है कि अमेरिका अपनी पारंपरिक और परमाणु क्षमता दोनों में लगातार निवेश कर रहा है।
🔶 उत्तर कोरिया पर नीति बरकरार — “पूर्ण निरस्त्रीकरण ही लक्ष्य”
नए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति दस्तावेज़ (NSS) में उत्तर कोरिया का सीधा उल्लेख न होने पर कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ी थी।
लेकिन दक्षिण कोरिया में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत केविन किम ने साफ कहा:
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ट्रंप प्रशासन की नीति में कोई बदलाव नहीं
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कोरियाई प्रायद्वीप का पूर्ण निरस्त्रीकरण ही प्राथमिक लक्ष्य
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यह नीति अमेरिका–दक्षिण कोरिया की संयुक्त प्रतिबद्धता है
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि NSS व्यापक दृष्टिकोण बयान करता है, न कि विशिष्ट संघर्षों का उल्लेख।
🌍 क्या दुनिया एक नए परमाणु समझौते की ओर बढ़ रही है?
ट्रंप के बयान से तीन संभावनाएँ सामने आती हैं:
1️⃣ परमाणु हथियारों की संख्या घटाने पर नई बातचीत
यदि चीन और रूस तैयार होते हैं, तो यह एक ऐतिहासिक हथियार नियंत्रण समझौता हो सकता है।
2️⃣ अमेरिका का रणनीतिक दबाव
ट्रंप अपने “बातचीत + दबाव” मॉडल के लिए जाने जाते हैं।
पहले दबाव, फिर समझौता।
3️⃣ वैश्विक सुरक्षा संतुलन में बड़ा बदलाव
यदि तीनों महाशक्तियाँ निरस्त्रीकरण पर सहमत होती हैं, तो:
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हथियारों की होड़ कम होगी
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वैश्विक संघर्षों का खतरा घटेगा
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अंतरराष्ट्रीय स्थिरता में सुधार होगा
लेकिन यह आसान नहीं होगा—
क्योंकि तीनों देशों की रणनीतिक महत्वाकांक्षाएँ अलग-अलग हैं।
📌 निष्कर्ष: ट्रंप का डीन्यूक्लियराइजेशन एजेंडा — दुनिया के लिए मौका या राजनीतिक संदेश?
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान कि उन्होंने चीन और रूस दोनों से परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत की है, निश्चित रूप से वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है।
उनके बयानों से यह साफ है कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में परमाणु हथियारों को मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।
हालांकि, उनके पुराने बयान—जिनमें वे अमेरिकी परमाणु परीक्षण शुरू करने की बात कर चुके हैं—उनकी नीति को जटिल बनाते हैं।
वैश्विक राजनीति विशेषज्ञ मानते हैं:
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यदि बातचीत सफल हुई तो दुनिया सुरक्षित होगी
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अगर बातचीत विफल हुई तो हथियारों की दौड़ और तेज हो जाएगी
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप वास्तव में एक नया परमाणु समझौता ला पाएंगे, या यह केवल कूटनीतिक संदेश भर है।
