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21 Jan 2026, Wed

झारखंड के स्कूलों के समय में बदलाव? उठी मांग और क्या है वजह

झारखंड के स्कूलों के समय में बदलाव? उठी मांग और क्या है वजह

School Time: झारखंड में ठंड और शीतलहर के बीच स्कूल समय बदलने की मांग तेज, पेरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार से की अपील

झारखंड में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बढ़ते प्रकोप के बीच अब स्कूलों के समय (School Time) को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। राज्य के कई जिलों में लगातार गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। इसी को देखते हुए झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से स्कूलों की समय-सारणी में बदलाव की मांग की है।

एसोसिएशन ने इस संबंध में शिक्षा सचिव, झारखंड सरकार को एक ज्ञापन सौंपते हुए सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों के समय में परिवर्तन करने की अपील की है। उनका कहना है कि मौजूदा मौसम में सुबह के समय बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा साबित हो रहा है।


राज्य में ठंड और शीतलहर का बढ़ता असर

झारखंड के कई हिस्सों में इन दिनों ठंड का प्रकोप चरम पर है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय के अनुसार, कांके, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, मेदिनीनगर, हजारीबाग सहित कई जिलों में न्यूनतम तापमान 3 से 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।

सुबह के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब:

  • घना कोहरा छाया रहता है

  • विजिबिलिटी कई जगहों पर 500 मीटर से भी कम हो जाती है

  • शीतलहर के कारण ठंडी हवाएं चलती हैं

इन परिस्थितियों में छोटे बच्चों का सुबह-सुबह स्कूल के लिए घर से निकलना स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों दृष्टि से खतरे से खाली नहीं है।


अभिभावकों की बढ़ती चिंताएं

अजय राय ने बताया कि एसोसिएशन को लगातार अभिभावकों से शिकायतें मिल रही हैं। खासकर छोटे बच्चे, जो पैदल, साइकिल या स्कूल बस से सफर करते हैं, उन्हें ठंड और कोहरे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में समय रहते निर्णय लेना बेहद जरूरी हो गया है।


स्कूल समय में बदलाव की प्रमुख मांगें

झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में सरकार के सामने कुछ ठोस सुझाव रखे हैं:

1. स्कूलों की कक्षाएं देर से शुरू हों

एसोसिएशन की मांग है कि सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में समय-सारणी में कम से कम दो घंटे का बदलाव किया जाए, ताकि कक्षाएं:

  • सुबह 9:00 बजे या

  • सुबह 9:30 बजे

से शुरू हो सकें। इससे बच्चों को घने कोहरे और अत्यधिक ठंड से कुछ राहत मिलेगी।


2. खुले मैदान में सुबह की प्रार्थना पर रोक

अजय राय ने कहा कि अत्यधिक ठंड के दिनों में:

  • सुबह की प्रार्थना खुले मैदान में न कराई जाए

  • प्रार्थना सभा कक्षा के अंदर आयोजित की जाए

इससे बच्चों को ठंडी हवा और कोहरे के सीधे संपर्क में आने से बचाया जा सकेगा।


3. पूरे राज्य में एक समान आदेश

एसोसिएशन ने सरकार से यह भी मांग की है कि:

  • पूरे झारखंड में एक समान आदेश जारी किया जाए

  • अलग-अलग जिलों में अलग नियम न हों

इससे स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और छात्रों के बीच समय को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे।


4. अत्यधिक ठंड वाले जिलों में विशेष व्यवस्था

जिन जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है, वहां:

  • कक्षाओं को अस्थायी रूप से बंद रखने
    या

  • ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने

पर भी विचार करने की मांग की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए ऐसी ठंड में नियमित रूप से स्कूल आना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।


विद्यार्थियों की सुरक्षा को बताया सर्वोपरि

अजय राय ने साफ शब्दों में कहा कि विद्यार्थियों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि है। पढ़ाई महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों की जान और सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने सरकार से अपील की कि मौसम की गंभीरता को देखते हुए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।


सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मांग पर राज्य सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। हालांकि, पिछले वर्षों में झारखंड समेत कई राज्यों में ठंड और शीतलहर के दौरान स्कूलों के समय में बदलाव या छुट्टी की घोषणा की जाती रही है।

अभिभावकों को उम्मीद है कि इस बार भी सरकार स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जल्द कोई फैसला लेगी।


निष्कर्ष

झारखंड में जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच स्कूल समय में बदलाव की मांग पूरी तरह से व्यावहारिक और आवश्यक नजर आती है। घना कोहरा, कम विजिबिलिटी और गिरता तापमान बच्चों के लिए वास्तविक खतरा बन सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर कितनी जल्दी और किस रूप में फैसला लेती है। अगर समय पर उचित कदम उठाए जाते हैं, तो इससे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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