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21 Jan 2026, Wed

झारखंड में 2–3 डिग्री तक और गिरेगा पारा, 7 जनवरी तक शीतलहर का अलर्ट, ठंड से कांपेंगे लोग

झारखंड में 2–3 डिग्री तक और गिरेगा पारा, 7 जनवरी तक शीतलहर का अलर्ट, ठंड से कांपेंगे लोग

झारखंड में ठंड ने एक बार फिर अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट आने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने 7 जनवरी तक शीतलहर (Cold Wave) चलने का अलर्ट जारी किया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। ठंडी हवाओं, घने कोहरे और गिरते तापमान के चलते सुबह और रात के समय लोगों को कंपकंपी का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण झारखंड में ठंड और तेज़ होगी। इसका असर खासतौर पर रांची, गुमला, लोहरदगा, पलामू, हजारीबाग और चतरा जैसे जिलों में अधिक देखने को मिल सकता है।


क्यों चर्चा में है?

झारखंड का मौसम इसलिए चर्चा में है क्योंकि—

  • न्यूनतम तापमान में 2–3 डिग्री की और गिरावट का अनुमान

  • 7 जनवरी तक शीतलहर चलने की चेतावनी

  • सुबह और रात में घना कोहरा

  • ठंडी हवाओं से स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर असर

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, जिससे ठंड का असर और तेज़ महसूस किया जा रहा है।


तापमान में गिरावट की वजह क्या है?

झारखंड में बढ़ती ठंड के पीछे कई मौसमी कारण जिम्मेदार हैं—

  1. उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएँ
    हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी और शुष्क हवाएँ झारखंड तक पहुँच रही हैं।

  2. पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
    उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंडा मौसम लंबे समय तक बना हुआ है।

  3. आसमान साफ रहने से रात में अधिक ठंड
    साफ आसमान के कारण रात में ज़मीन से ऊष्मा तेजी से निकलती है, जिससे न्यूनतम तापमान और गिर जाता है।

  4. कोहरे की स्थिति
    सुबह के समय घना कोहरा तापमान को और कम महसूस कराता है।


किन इलाकों में ठंड का असर ज्यादा?

राज्य के पठारी और वनांचल क्षेत्रों में ठंड का असर अपेक्षाकृत अधिक देखा जा रहा है—

  • रांची: सुबह और रात में तेज़ ठंड

  • गुमला और लोहरदगा: न्यूनतम तापमान काफी नीचे

  • पलामू और चतरा: शीतलहर का सीधा असर

  • हजारीबाग: ठंडी हवाओं के कारण दिन में भी सर्दी

ग्रामीण इलाकों में हालात और भी कठिन हैं, जहाँ पर्याप्त गरम कपड़े और हीटर जैसी सुविधाएँ सीमित होती हैं।


जनजीवन पर क्या असर पड़ रहा है?

ठंड बढ़ने के साथ ही झारखंड में जनजीवन प्रभावित होने लगा है—

  • सुबह-सुबह सड़कों पर आवाजाही कम

  • स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी

  • ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं

  • बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर चहल-पहल घट गई है

निर्माण कार्य, खेतों में काम और दिहाड़ी मजदूरी पर भी ठंड का असर साफ दिखाई दे रहा है।


स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

शीतलहर का सबसे अधिक असर स्वास्थ्य पर पड़ता है—

  • सर्दी-खांसी और बुखार के मामले बढ़ रहे हैं

  • बुजुर्गों और बच्चों में निमोनिया व सांस संबंधी समस्याओं का खतरा

  • ठंड के कारण ब्लड प्रेशर और हार्ट मरीजों को विशेष सावधानी की आवश्यकता

डॉक्टरों की सलाह है कि लोग बिना ज़रूरत सुबह जल्दी या देर रात बाहर न निकलें और शरीर को पूरी तरह ढक कर रखें।


मौसम विभाग की सलाह

मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है—

  • गरम कपड़े, टोपी और मफलर का उपयोग करें

  • ठंडी हवा से बचने के लिए दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद रखें

  • सुबह के समय कोहरे में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें

  • बुजुर्गों और बच्चों को विशेष देखभाल में रखें

  • गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें

राज्य प्रशासन द्वारा जरूरतमंदों के लिए अलाव और रैन बसेरों की व्यवस्था किए जाने की भी अपील की गई है।


किसानों और फसलों पर असर

ठंड और कोहरे का असर खेती पर भी पड़ सकता है—

  • रबी फसलों पर पाले का खतरा

  • सब्जियों और दलहन फसलों को नुकसान की आशंका

  • किसानों को खेतों में सिंचाई और पाला-रोधी उपाय अपनाने की सलाह

हालांकि कुछ फसलों के लिए हल्की ठंड लाभदायक भी मानी जाती है, लेकिन अत्यधिक शीतलहर नुकसानदायक हो सकती है।


आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार—

  • 7 जनवरी तक ठंड और शीतलहर बनी रह सकती है

  • उसके बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी संभव

  • कोहरे की स्थिति धीरे-धीरे कम हो सकती है

हालाँकि, उत्तर भारत में मौसम के रुख पर झारखंड का तापमान निर्भर करता रहेगा।


निष्कर्ष

झारखंड में बढ़ती ठंड और शीतलहर ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। 2–3 डिग्री तक तापमान गिरने और 7 जनवरी तक शीतलहर के अलर्ट के चलते राज्य के कई हिस्सों में लोग ठंड से कांपने को मजबूर हैं। ऐसे में सावधानी, सतर्कता और प्रशासनिक सहयोग बेहद ज़रूरी है।

यदि लोग मौसम विभाग की सलाहों का पालन करें और प्रशासन ठंड से बचाव के इंतज़ाम मजबूत करे, तो इस सर्द दौर को सुरक्षित तरीके से पार किया जा सकता है। ठंड अभी कुछ दिन और सताने वाली है, इसलिए सावधान रहना ही सबसे बेहतर उपाय है।

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