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21 Jan 2026, Wed

दुलारचंद यादव हत्या काण्ड: शव यात्रा में भूचाल, गोलीबारी-पत्थरबाजी से सुन्न हुआ मोकामा

दुलारचंद यादव हत्या काण्ड: शव यात्रा में भूचाल, गोलीबारी-पत्थरबाजी से सुन्न हुआ मोकामा

दुलारचंद यादव हत्या काण्ड: शव यात्रा में मोकामा सुलगा, गोलीबारी और पत्थरबाजी से मचा हड़कंप

बिहार का मोकामा एक बार फिर हिंसा और तनाव के साये में आ गया है। जन सुराज पार्टी के नेता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद शुक्रवार को उनकी शव यात्रा के दौरान भयंकर बवाल मच गया।
उग्र भीड़ ने शव वाहन पर ईंट-पत्थर बरसाने के साथ-साथ जमकर गोलीबारी की, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल तैनात कर हालात को नियंत्रण में करने की कोशिश की है।


🔥 मोकामा में हिंसा का माहौल

सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जब दुलारचंद यादव की शव यात्रा उनके गांव से श्मशान घाट की ओर निकली, तब हजारों लोग मौजूद थे।
लोगों में भारी आक्रोश था और न्याय की मांग को लेकर नारेबाज़ी हो रही थी।
इसी दौरान भीड़ का एक हिस्सा अचानक उग्र हो गया और शव वाहन पर पत्थर फेंकने लगा। देखते-ही-देखते माहौल हिंसक हो गया और कई राउंड फायरिंग की आवाज़ें गूंज उठीं।

आनन-फानन में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और कई इलाकों को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। पुलिस के अनुसार, “हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन नियंत्रण में हैं।”


🕯️ कौन थे दुलारचंद यादव?

दुलारचंद यादव मोकामा क्षेत्र के प्रमुख स्थानीय नेता थे और हाल के दिनों में उन्होंने जन सुराज पार्टी (Prashant Kishor के नेतृत्व वाली) से जुड़कर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
वह लगातार सत्ता दलों के खिलाफ मुखर थे और अपने क्षेत्र में जनसंपर्क अभियानों के लिए जाने जाते थे।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनकी पहचान एक “जननायक” और संगठनकर्ता” के रूप में थी।


⚠️ चुनावी रंजिश में हुई हत्या

घटना की शुरुआत गुरुवार दोपहर हुई, जब दुलारचंद यादव की दिनदहाड़े गोली मारकर और गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी गई।
यह वारदात इतनी तेज़ी से हुई कि प्रत्यक्षदर्शी कुछ समझ ही नहीं पाए।
पुलिस के अनुसार, हत्या का कारण चुनावी रंजिश बताया जा रहा है।

मृतक के परिजनों ने जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है।
हालांकि, इस आरोप को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है।


💥 शव यात्रा में कैसे भड़की हिंसा

हत्या के अगले दिन सुबह जब पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा, तो पूरा गांव गुस्से में था।
लोगों ने न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर जुलूस निकाला और दुकानों को बंद रखा।
करीब 11 बजे जब शव यात्रा आगे बढ़ी, तब तक हजारों लोग सड़कों पर उमड़ चुके थे।

इसी बीच कुछ शरारती तत्वों ने माहौल को भड़काने की कोशिश की।
देखते-ही-देखते पत्थरबाजी और गोलीबारी शुरू हो गई।
कई वाहनों के शीशे टूट गए, कुछ घरों में आगजनी की भी खबरें आईं।
पुलिस बल को हालात काबू में लाने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा।


🚨 पुलिस की बड़ी कार्रवाई

हिंसा की सूचना मिलते ही मोकामा थाना पुलिस, SDPO और जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे।
कई थानों की फोर्स के साथ केंद्रीय पुलिस बल (CRPF) की टुकड़ियां भी बुला ली गईं।
पूरे मोकामा और आसपास के गांवों में फ्लैग मार्च किया गया।

जिलाधिकारी ने बताया कि “स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग शुरू कर दी है ताकि गलत सूचना फैलाने वाले तत्वों पर तत्काल रोक लगाई जा सके।


🧭 न्याय की मांग और राजनीतिक बयानबाज़ी

घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
जन सुराज पार्टी ने कहा कि “यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या है।”
वहीं सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर माहौल भड़काने का आरोप लगाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि “दुलारचंद यादव अपने क्षेत्र में गरीबों की आवाज़ थे। उनकी हत्या ने सबको झकझोर दिया है।”
लोग अब न्याय की मांग को लेकर धरना देने की तैयारी में हैं।


🧱 तनावपूर्ण माहौल में बंद हुआ मोकामा

हत्या और हिंसा के बाद पूरे मोकामा क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है।
अधिकांश दुकानें और बाज़ार बंद हैं।
पुलिस ने कई इलाकों में कैंप स्थापित कर रखा है और ड्रोन सर्विलांस से हालात पर नजर रखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।


⚖️ क्या मिलेगा न्याय?

यह मामला बिहार की राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
राज्य में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और इस तरह की घटनाएं सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
सवाल यह है कि क्या इस बार दोषियों को सजा मिलेगी या यह मामला भी राजनीतिक उठा-पटक में गुम हो जाएगा?


🔚 निष्कर्ष

दुलारचंद यादव की हत्या और उसके बाद मोकामा में भड़की हिंसा ने बिहार की राजनीति को हिला दिया है।
शव यात्रा जैसी संवेदनशील घड़ी में हुई गोलीबारी ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में राजनीति और अपराध का गठजोड़ अब भी गहराई तक फैला है।
प्रशासन के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है — न सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने की, बल्कि जन विश्वास बहाल करने की भी।

मोकामा की गलियों में आज भी दुलारचंद यादव के समर्थक न्याय की पुकार लगा रहे हैं।
अब देखना यह है कि बिहार सरकार इस पुकार को कितनी गंभीरता से सुनती है और कब तक दुलारचंद के हत्यारों को सजा दिला पाती है।

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