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21 Jan 2026, Wed

बांग्लादेशी नेता की भारत विरोधी बयानबाज़ी: “दिल्ली की गद्दी जला देंगे” जैसी धमकियों पर बढ़ी चिंता

बांग्लादेशी नेता की भारत विरोधी बयानबाज़ी: “दिल्ली की गद्दी जला देंगे” जैसी धमकियों पर बढ़ी चिंता

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनावों की घोषणा (12 फरवरी) के साथ ही राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। इसी क्रम में हाल के दिनों में कुछ बांग्लादेशी नेताओं द्वारा भारत के खिलाफ दिए गए तीखे और विवादित बयानों ने नई कूटनीतिक और सुरक्षा चिंताएँ पैदा कर दी हैं। खासतौर पर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, जिन्हें सामूहिक रूप से “सेवन सिस्टर्स” कहा जाता है, को लेकर की गई टिप्पणियों को भारत में गंभीरता से देखा जा रहा है।

ये बयान उस समय सामने आए हैं जब बांग्लादेश कथित “जुलाई विद्रोह” के बाद एक नए राजनीतिक चरण में प्रवेश कर रहा है और देश का चुनावी वातावरण पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है।


नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) और भारत विरोधी बयान

शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए कथित जुलाई विद्रोह से उभरी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के कुछ नेताओं ने हालिया रैलियों में भारत के खिलाफ तीखी भाषा का प्रयोग किया है।

एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने एक सार्वजनिक सभा में कहा कि बांग्लादेश में “दिल्ली का वर्चस्व” स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रतीकात्मक रूप से “दिल्ली की गद्दी जला दी जाएगी”। इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक भारत विरोधी राष्ट्रवादी बयानबाज़ी के रूप में देख रहे हैं, जिसे चुनावी समर्थन जुटाने की रणनीति माना जा रहा है।


भारत के “Seven Sisters” पर विवादित टिप्पणी

इसी पार्टी के दक्षिण क्षेत्र के मुख्य आयोजक हसनत अब्दुल्ला ने इससे भी आगे बढ़ते हुए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर बयान दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई, तो भारत के “सेवन सिस्टर्स” राज्य अलग-थलग पड़ सकते हैं।

भारत के उत्तर-पूर्वी सात राज्य—

  • अरुणाचल प्रदेश

  • असम

  • मणिपुर

  • मेघालय

  • मिजोरम

  • नागालैंड

  • त्रिपुरा

एक संकीर्ण भू-भाग, जिसे “सिलीगुड़ी कॉरिडोर” या “चिकन नेक” कहा जाता है, के माध्यम से शेष भारत से जुड़े हैं। इसी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के कारण इस तरह की बयानबाज़ी को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाता है।


रैली की पृष्ठभूमि: शरीफ उस्मान हादी पर हमला

ये बयान 13 दिसंबर को ढाका में आयोजित एक रैली के दौरान दिए गए, जो एनसीपी समर्थित “इंकिलाब मंचा” द्वारा आयोजित की गई थी। यह रैली पार्टी के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी पर हुए गोलीकांड के विरोध में आयोजित की गई थी।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम “पीड़ित नागरिकों की रैली और जन-प्रतिरोध” के नाम से राष्ट्रीय संग्रहालय, शाहबाग के सामने हुआ। शरीफ उस्मान हादी आगामी 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे थे और चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला हुआ।


भारत पर लगाए गए गंभीर आरोप

हसनत अब्दुल्ला ने इस रैली के दौरान भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि—

  • बांग्लादेश में अराजकता फैलाने वाली ताकतों को भारत का समर्थन प्राप्त है

  • चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास किए जा रहे हैं

  • शरीफ उस्मान हादी पर हुए हमले में शामिल तत्वों को भारत से संरक्षण मिल रहा है

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय सुरक्षा बल सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की हत्याओं में शामिल रहे हैं। इन आरोपों पर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


“बांग्लादेश जवाब देगा” — चेतावनी भरी भाषा

हसनत अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि यदि भारत उन ताकतों को शरण देता है जो बांग्लादेश की संप्रभुता और मतदान अधिकारों का सम्मान नहीं करतीं, तो “बांग्लादेश जवाब देगा”। उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश की अस्थिरता के दूरगामी क्षेत्रीय प्रभाव होंगे और इसका असर सीमाओं के बाहर तक जा सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भाषा चुनावी ध्रुवीकरण को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है, लेकिन इससे क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ सकता है।


चुनावी हिंसा और अंतरराष्ट्रीय चिंता

बांग्लादेश में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है। इस बार का चुनावी माहौल इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि—

  • देश की प्रमुख पार्टी अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है

  • सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ है

  • अमेरिका समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने संभावित बड़े पैमाने पर हिंसा को लेकर चिंता जताई है

हसनत अब्दुल्ला ने दावा किया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके सहयोगी धन, हथियार और प्रशिक्षण के ज़रिए बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।


निष्कर्ष

बांग्लादेश के कुछ नेताओं द्वारा भारत और उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर दिए गए बयान चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखे जा रहे हैं, लेकिन इनका असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता। भारत-बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के बीच संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के लिए यह आवश्यक है कि—

  • गैर-जिम्मेदार बयानबाज़ी से दूरी बनाए रखें

  • कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता दें

  • चुनावी राजनीति को द्विपक्षीय संबंधों पर हावी न होने दें

आने वाले हफ्तों में बांग्लादेश का चुनावी माहौल और भारत-बांग्लादेश संबंध किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर रहेगी।

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