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21 Jan 2026, Wed

बिहार चुनाव 2025: दो विज़न — “प्रण” व “संकल्प”

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बिहार चुनाव 2025: दो विज़न — “प्रण” व “संकल्प”

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राज्य की राजनीति एक नए मोड़ पर है। इस बार की लड़ाई सिर्फ सीटों व गठबंधनों की नहीं, बल्कि विजन और विकास मॉडल की जंग भी है।
दो पाट —

  • एक ओर तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) द्वारा प्रस्तुत “Tejashwi प्रण/प्रतीज्ञा”

  • दूसरी ओर नीतीश कुमार नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का “संकल्प पत्र/विजन”

दोनों ही को नए बिहार के वादे के साथ मैदान में उतरना है — युवाओं को रोजगार देना, लॉजिस्टिक-इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना, सामाजिक कल्याण बढ़ाना, और राज्य को “भाग नहीं बढ़ने वाला बल्कि आने वालों के लिए विकल्प बनने वाला” बनाना।


🔶 तेजस्वी यादव का “प्रण” — महागठबंधन का घोषणापत्र

तेजस्वी यादव ने ‘**Tejashwi Pran Patra’ शीर्षक से महागठबंधन का घोषणापत्र जारी किया, जो उनके शब्दों में नहीं सिर्फ वादा है बल्कि प्रतिज्ञा-निर्णय है। Business Standard+2Business Standard+2

✨ प्रमुख वादे:

  • हर परिवार में कम-से-कम एक सरकारी नौकरी सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना। घोषणापत्र में कहा गया है कि सरकार गठन के 20 दिन के भीतर अधिनियम लाया जाएगा, और 20 महीने के भीतर यह लागू होगा। Patna Press+1

  • महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा: “मै-बहिन-मान योजना” के तहत हर महीने ₹ 2,500 की सहायता राशि। theweek.in+1

  • 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली हर घर को। theweek.in+1

  • आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण, “जीविका दीदियों” को सरकारी कर्मचारियों का दर्जा और मासिक वेतन ₹ 30,000। financialexpress.com+1

  • आईटी पार्क, SEZ, एक्सप्रेसवे-नेटवर्क, शिक्षा-सिटी, कृषि-उद्योग आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर। theweek.in+1

यह दृष्टिकोण विशेष रूप से रोजगार, सामाजिक कल्याण और त्वरित बदलाव पर केंद्रित है — तेजस्वी ने सार्वजनिक मंच पर कहा:

“आपने उन्हें 20 साल दिए, हमें 20 महीने दें…” The Times of India


🔷 नीतीश कुमार का “संकल्प” — एनडीए का विज़न दस्तावेज़

एनडीए ने अब तक अपेक्षानुसार घोषणा-पुस्तिका को प्रमुखता से उजागर नहीं किया है, लेकिन राज्य में जारी गतिविधियों से विज़न झलक रहा है। उदाहरण के लिए:

  • नीतीश ने अगले पाँच वर्षों (2025-30) में एक करोड़ नौकरियाँ देने का लक्ष्य रखा है। The Times of India

  • किसानों, युवाओं और पलायन रोकने के लिए लगभग ₹ 62,000 करोड़ की योजनाएं शुरू की गईं। Navbharat Times

  • एनडीए ने ‘कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि’, मास-रहित बिजली, पक्के मकान, 7 नए एक्सप्रेसवे जैसे वादे घोषित किए हैं। Navbharat Times

नीतीश का संकल्पः “बिहार को विकास की राह पर ले जाना, पलायन रोकना, इंडस्ट्री-स्किल-इन्फ्रास्ट्रक्चर जोड़ना” — यानी धीमा लेकिन मापनीय विकास मॉडल।


⚔️ दोनों एजेंडों की तुलना

आयाम महागठबंधन (तेजस्वी) एनडीए (नीतीश)
प्रमुख वादा हर घर को नौकरी, मासिक सहारा, मुफ्त बिजली उद्योग-रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, पलायन रोकना
वित्तीय बोझ/काल-सीमा त्वरित-पॉप्युलिस्ट वादे: 20 दिन-20 माह कानून का समय विस्तार-मॉडल: 5 साल में एक करोड़ नौकरियाँ
केंद्रिता सोशल कल्याण, नियमितीकरण, मुफ्त-उपहार विकास-इंडस्ट्री, स्किल-मॉडल, इंफ्रास्ट्रक्चर
जोखिम वित्तीय व्यवहार्यता, बजट दबाव धीमी गति, अपेक्षित परिणाम तक समय
पिच-टोन “नया बिहार”, तेजी-परिवर्तन “संकल्प-विकास”, भरोसा-प्रक्रिया

📌 क्यों महत्वपूर्ण है यह संघर्ष?

  • बिहार में युवाओं, बेरोज़गारों, पलायन-घटित प्रवासी-श्रमियों की संख्या बड़ी है। एजेंडों में नौकरी-उपलब्धि का वादा इसलिए केंद्र बना है।

  • राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर-लक्षित निवेश, उद्योग-केंद्रित विकास, एवं सामाजिक-कल्याण के वादे दोनों ने चुनावी धरातल पर हवा बनाई है।

  • मुख्यमंत्री चेहरे, गठबंधन-पार्टियों के गठजोड़, घोषणापत्र की समयबद्धता और बजट व्यवहार्यता — ये सभी चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगे।


📝 निष्कर्ष

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव का “प्रण” और नीतीश कुमार का “संकल्प” दोनों ही नए बिहार का विज़न पेश करते हैं — लेकिन दिशा, गति, प्राथमिकता और रणनीति में फर्क है।
अगर तेजस्वी का मॉडल त्वरित, व्यापक कल्याण-रोजगार-मुखी है, तो नीतीश का विकास-मॉडल मापनीय, इंफ्रास्ट्रक्चर-संवर्धित और भरोसा-आधारित नजर आता है।
अगले कुछ सप्ताह में यह तय होगा कि जनता को कौन-सा विज़न बेहतर लगता है — तत्काल राहत वाला वादा या लंबी अवधि का स्थिर विकास मॉडल।

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