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21 Jan 2026, Wed

बिहार बनेगा देश का नया ग्रीन एनर्जी हब, 50 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगा राज्य का ऊर्जा भविष्य

बिहार बनेगा देश का नया ग्रीन एनर्जी हब, 50 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगा राज्य का ऊर्जा भविष्य

हरित ऊर्जा की ओर बिहार का बड़ा कदम, सौर शक्ति बनेगी विकास की नई रीढ़

बदलती जलवायु, बढ़ता ऊर्जा संकट और कार्बन उत्सर्जन को लेकर वैश्विक चिंता के बीच अब बिहार ने भविष्य की दिशा स्पष्ट रूप से तय कर ली है। राज्य सरकार का फोकस अब ऐसे विकास मॉडल पर है, जिसमें ऊर्जा भी स्वच्छ हो और विकास भी टिकाऊ। इसी विज़न के तहत बिहार को हरित ऊर्जा (Green Energy) का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू कर दी गई है।

राज्य के उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा है कि आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, बिहार के औद्योगिक और आर्थिक विकास की रीढ़ बनेगी। सरकार का मानना है कि स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के बिना न तो उद्योग टिकाऊ हो सकते हैं और न ही बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन संभव है।


सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण पर मंथन

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए राज्य में सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) विषय पर एक एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में—

  • राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी

  • उद्योग जगत के प्रतिनिधि

  • ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ

ने भाग लिया और बिहार के ऊर्जा भविष्य को लेकर गहन मंथन किया।

संगोष्ठी का उद्देश्य केवल तकनीकी चर्चा नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि किस तरह नीति, निवेश और तकनीक के समन्वय से बिहार को हरित ऊर्जा का अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।


हरित ऊर्जा से औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार

उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार अब औद्योगिक विकास की नई राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। नवगठित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रोज़गार सृजन है और इसके लिए उद्योगों को मजबूत करना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत “समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार” को विशेष महत्व दिया गया है। इसी विज़न के अंतर्गत—

  • उद्योगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना

  • ऊर्जा लागत को कम करना

  • निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना

जैसे लक्ष्यों पर काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा आधारित उद्योग न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे, बल्कि लंबे समय में आर्थिक रूप से भी अधिक टिकाऊ साबित होंगे।


पांच साल में 50 लाख करोड़ निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह निवेश—

  • ऊर्जा

  • उद्योग

  • इंफ्रास्ट्रक्चर

  • और सेवा क्षेत्रों

में प्रस्तावित है।

छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को मजबूती देने के लिए—

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय को सक्रिय किया गया है

  • स्थानीय उत्पादों के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम का गठन किया गया है

सरकार का आकलन है कि इन कदमों का सीधा असर रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पलायन की समस्या पर पड़ेगा।


सौर ऊर्जा के लिए आदर्श राज्य है बिहार

बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने कहा कि बिहार में उद्योग, कृषि, परिवहन और शहरीकरण के विस्तार के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि—

  • वर्ष 2034–35 तक राज्य को लगभग 18,000 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा सबसे टिकाऊ और व्यवहारिक समाधान है।

उन्होंने बताया कि—

  • बिहार में साल के लगभग 300 दिन पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है

  • राज्य की भौगोलिक स्थिति सोलर पावर उत्पादन के लिए अनुकूल है

ऐसे में बड़े सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर और कृषि-सौर परियोजनाएँ बिहार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।


नई नवीकरणीय ऊर्जा नीति से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

राज्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2024 को निवेशकों के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस नीति के तहत—

  • सोलर पावर प्रोजेक्ट

  • रूफटॉप सोलर सिस्टम

  • कैप्टिव पावर प्लांट

  • ऊर्जा भंडारण (Battery Storage) परियोजनाओं

को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

संगोष्ठी के दौरान देश की कई प्रमुख कंपनियों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति—

  • निवेश प्रक्रिया को सरल बनाएगी

  • परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करेगी

  • बिहार को हरित ऊर्जा के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाएगी


पर्यावरण और विकास का संतुलन

हरित ऊर्जा की ओर यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे—

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी

  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी

  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद मिलेगी

सरकार का लक्ष्य है कि बिहार का विकास ऐसा हो, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और टिकाऊ हो।


निष्कर्ष

बिहार को हरित ऊर्जा का केंद्र बनाने की यह पहल राज्य के विकास मॉडल में एक मौलिक बदलाव का संकेत देती है। सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय तकनीकों के माध्यम से बिहार न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि रोजगार, उद्योग और पर्यावरण—तीनों मोर्चों पर मजबूत राज्य के रूप में उभर सकता है।

यदि घोषित नीतियाँ और निवेश योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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