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21 Jan 2026, Wed

यूनुस को अपनों से अल्टीमेटम: कातिलों को जल्द पकड़ो, वरना सरकार गिराने की चेतावनी

यूनुस को अपनों से अल्टीमेटम: कातिलों को जल्द पकड़ो, वरना सरकार गिराने की चेतावनी

बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान उभरे प्रभावशाली आंदोलनकारी मंच इंकलाब मंचो (Inqilab Moncho) ने देश की मौजूदा अंतरिम सरकार को खुली चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि यदि उसके संयोजक शरीफ उस्मान हादी की हत्या में जल्द न्याय नहीं मिला, तो वह सरकार को हटाने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की शुरुआत करेगा। इस चेतावनी के साथ ही बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का खतरा और गहरा हो गया है।


हादी की हत्या के बाद बेकाबू हालात

शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि इस हिंसा का निशाना बांग्लादेशी मीडिया बना। प्रदर्शनकारियों ने दो बड़े समाचार संस्थानों की इमारतों में आग लगा दी, जिससे प्रेस स्वतंत्रता और आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

हालांकि, इतने दिनों बाद भी हादी के हत्यारों का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे जनाक्रोश और तेज़ होता जा रहा है।


अंतरिम सरकार को अल्टीमेटम

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, इंकलाब मंचो के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने सोमवार को ढाका के शहीद हादी चत्तर पर आयोजित एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह चेतावनी दी।

जाबेर ने कहा कि संगठन ने हादी की अंतिम नमाज़ के बाद 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बावजूद न तो गृह सलाहकार और न ही संबंधित अधिकारियों की ओर से हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कार्रवाई हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्रालय की ब्रीफिंग में गृह सलाहकार या उनके विशेष सहायक की गैर-मौजूदगी इस गंभीर मामले को लेकर सरकार की गैर-गंभीरता को दर्शाती है।


‘स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल’ की मांग

इंकलाब मंचो ने अंतरिम सरकार के सामने कई कड़ी मांगें रखीं।

  • हादी हत्या मामले की सुनवाई के लिए तुरंत ‘स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल’ गठित किया जाए

  • जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए FBI या स्कॉटलैंड यार्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली जाए

जाबेर ने आरोप लगाया कि देश की सिविल और सैन्य खुफिया एजेंसियां अपराधियों की पहचान करने में नाकाम रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि खुफिया तंत्र के भीतर मौजूद, उनके शब्दों में, “अवामी सहयोगियों” को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए।


चुनाव से पहले न्याय की चेतावनी

इंकलाब मंचो ने साफ शब्दों में कहा है कि आगामी चुनाव से पहले अगर न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। संगठन ने ऐलान किया कि वह जल्द ही एक विरोध जुलूस निकालेगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि अंतरिम सरकार को समर्थन जारी रखा जाए या उसे गिराने के लिए आंदोलन शुरू किया जाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि हादी के हत्यारों और उन्हें संरक्षण देने वालों को न्याय के कटघरे में लाए बिना संगठन सड़कों से नहीं हटेगा।


कैसे हुई उस्मान हादी की हत्या?

शरीफ उस्मान हादी पिछले साल हुए ‘जुलाई विद्रोह’ के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे। इसी आंदोलन के दबाव में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार का पतन हुआ था।

हादी 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। 12 दिसंबर को जब वे बिजयनगर इलाके में प्रचार के लिए निकले थे, तभी रिक्शा से यात्रा करते समय उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई।

  • 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया

  • 18 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई


अंतरिम सरकार की प्रतिक्रियाएं

हादी की मौत के बाद ढाका में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात को संभालने के लिए अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा की।

उन्होंने—

  • हादी के परिवार का खर्च उठाने की घोषणा की

  • प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की

  • भरोसा दिलाया कि हत्यारे जल्द पकड़े जाएंगे

शुरुआत में कुछ प्रदर्शनकारियों ने हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया, क्योंकि हादी भारत-विरोधी बयानों के लिए जाने जाते थे। हालांकि बाद में बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि हत्यारों का भारत से कोई संबंध नहीं है।


बांग्लादेश के सामने बड़ी चुनौती

इंकलाब मंचो की धमकी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सामने एक गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। एक ओर न्याय की मांग और जनता का गुस्सा है, तो दूसरी ओर चुनाव से पहले स्थिरता बनाए रखने की चुनौती।

यदि हादी हत्या मामले में जल्द और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदल सकता है।


निष्कर्ष

शरीफ उस्मान हादी की हत्या अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता की कसौटी बन चुकी है। इंकलाब मंचो का अल्टीमेटम और बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन देश के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं।

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