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5 Feb 2026, Thu

रांची में आरएसएस के संवाद कार्यक्रम में आज शिरकत करेंगे मोहन भागवत

रांची में आरएसएस के संवाद कार्यक्रम में आज शिरकत करेंगे मोहन भागवत

झारखंड की राजधानी रांची आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम की साक्षी बनने जा रही है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आज रांची पहुंचकर इस कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां वे राष्ट्रनिर्माण, सामाजिक समरसता और भारत की सांस्कृतिक चेतना जैसे अहम विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। इस कार्यक्रम को संघ की वैचारिक गतिविधियों और सामाजिक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

संवाद कार्यक्रम क्यों है खास?

आरएसएस समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में संवाद कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनका उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित करना और राष्ट्रीय मुद्दों पर वैचारिक चर्चा को बढ़ावा देना होता है। रांची में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और स्वयंसेवकों की भागीदारी अपेक्षित है।

इस कार्यक्रम में मोहन भागवत राष्ट्रनिर्माण में समाज की भूमिका, युवाओं की जिम्मेदारी, सांस्कृतिक मूल्यों और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर विचार रख सकते हैं।

राष्ट्रनिर्माण पर रहेगा मुख्य फोकस

कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “राष्ट्रनिर्माण” बताया जा रहा है। आरएसएस की विचारधारा के अनुसार राष्ट्रनिर्माण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से संभव है। मोहन भागवत अपने संबोधन में इस बात पर जोर दे सकते हैं कि—

  • मजबूत राष्ट्र की नींव संस्कृति और मूल्य होते हैं

  • समाज में एकता और समरसता आवश्यक है

  • शिक्षा, सेवा और चरित्र निर्माण से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है

संघ प्रमुख इससे पहले भी कई मंचों से यह कह चुके हैं कि राष्ट्र की मजबूती केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों से आती है।

झारखंड और आदिवासी समाज पर भी हो सकती है चर्चा

रांची और झारखंड का सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य विशिष्ट है, जहां आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। माना जा रहा है कि मोहन भागवत अपने संबोधन में—

  • आदिवासी संस्कृति के संरक्षण

  • समाज के हाशिये पर खड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने

  • स्थानीय परंपराओं और राष्ट्रीय चेतना के बीच संतुलन

जैसे विषयों पर भी बात कर सकते हैं। संघ लंबे समय से आदिवासी समाज के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा से जुड़े कार्यक्रम चला रहा है।

युवाओं और स्वयंसेवकों को मिलेगा मार्गदर्शन

इस संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और आरएसएस स्वयंसेवक भी शामिल होंगे। मोहन भागवत का संबोधन युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक माना जा रहा है। वे युवाओं से—

  • राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने

  • समाज सेवा से जुड़ने

  • सकारात्मक सोच और अनुशासन अपनाने

का आह्वान कर सकते हैं। संघ प्रमुख अक्सर युवाओं को राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते रहे हैं।

सामाजिक समरसता और संवाद पर जोर

आरएसएस हाल के वर्षों में संवाद और समरसता पर विशेष जोर देता रहा है। रांची का यह कार्यक्रम भी इसी दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है। संघ का मानना है कि—

  • विभिन्न विचारधाराओं के बीच संवाद जरूरी है

  • समाज में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन टकराव नहीं

  • राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियाँ

मोहन भागवत के रांची आगमन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

मोहन भागवत के इस दौरे और संवाद कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा है। हालांकि आरएसएस खुद को सांस्कृतिक संगठन बताता है, लेकिन उसके कार्यक्रमों और विचारों का सामाजिक-राजनीतिक विमर्श पर प्रभाव माना जाता है। ऐसे में रांची का यह कार्यक्रम भी राज्य और देश की राजनीति में वैचारिक बहस को नई दिशा दे सकता है।

निष्कर्ष

रांची में आयोजित आरएसएस का संवाद कार्यक्रम और उसमें मोहन भागवत की सहभागिता, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। यह कार्यक्रम न केवल स्वयंसेवकों और समर्थकों के लिए, बल्कि समाज के व्यापक वर्ग के लिए भी विचार-मंथन का मंच बनेगा।

राष्ट्रनिर्माण, युवाओं की भूमिका, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों पर संघ प्रमुख के विचार आने वाले समय में सामाजिक और वैचारिक संवाद को प्रभावित कर सकते हैं। रांची का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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