60 की उम्र तक ₹5 करोड़ जुटाने का आसान फॉर्मूला: जानें 25, 30, 35 और 40 साल में कितनी SIP करनी होगी
रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित और आरामदायक जीवन हर किसी का सपना होता है। लेकिन इस सपने को सच करने के लिए ज़रूरी है कि समय रहते निवेश की सही रणनीति बनाई जाए। हाल ही में सीए पारस गंगवाल ने एक पोस्ट में बताया कि अगर कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र तक ₹5 करोड़ का फंड तैयार करना चाहता है, तो उसे किस उम्र से कितनी मासिक एसआईपी (Systematic Investment Plan) करनी होगी।
उनके अनुसार, निवेश जितनी जल्दी शुरू करेंगे, बोझ उतना ही कम रहेगा। अगर निवेश की शुरुआत में देरी होती है, तो हर 5 साल पर निवेश की ज़रूरी राशि लगभग दोगुनी हो जाती है।
उम्र के हिसाब से SIP की ज़रूरत
सीए गंगवाल ने अपने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि 60 साल की उम्र तक ₹5 करोड़ के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अलग-अलग उम्र पर मासिक निवेश की ज़रूरत कितनी होगी।
| उम्र (Years) | हर महीने की SIP राशि |
|---|---|
| 25 साल | ₹7,800 |
| 30 साल | ₹14,300 |
| 35 साल | ₹26,600 |
| 40 साल | ₹50,500 |
| 45 साल | ₹1,00,000 |
| 50 साल | ₹2,17,000 |
नोट: हर 5 साल की देरी निवेश राशि को लगभग दोगुना कर देती है।
25 साल की उम्र: सबसे सुनहरा अवसर
अगर कोई युवा 25 साल की उम्र में निवेश की शुरुआत करता है, तो उसे सिर्फ ₹7,800 प्रति माह निवेश करना होगा। यह रकम नौकरी की शुरुआती सैलरी से भी आसानी से मैनेज की जा सकती है। इस उम्र में जिम्मेदारियां कम होती हैं और लंबा समय मिलने के कारण कंपाउंडिंग का जादू पूरी तरह काम करता है।
30 साल की उम्र: थोड़ी बढ़ी जिम्मेदारी
अगर कोई निवेशक 30 की उम्र में शुरुआत करता है, तो उसे ₹14,300 प्रति माह निवेश करना होगा। यानी केवल 5 साल की देरी से राशि लगभग दोगुनी हो गई। इस उम्र में शादी और परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं, लेकिन फिर भी यह निवेश प्रैक्टिकल माना जा सकता है।
35 साल की उम्र: बोझ बढ़ने लगता है
35 साल की उम्र में निवेश की शुरुआत करने पर मासिक एसआईपी ₹26,600 हो जाती है। इस उम्र में बच्चों की पढ़ाई, गृह ऋण (होम लोन) और अन्य खर्चे बढ़ जाते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि निकालना आम नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
40 साल की उम्र: लक्ष्य मुश्किल होता चला जाता है
40 की उम्र में शुरुआत करने वालों के लिए मासिक एसआईपी ₹50,500 करनी होगी। यानी हर महीने आधा लाख रुपये निवेश करना होगा। यह रकम केवल हाई-इनकम ग्रुप वाले लोग ही आसानी से निकाल सकते हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि नियमित निवेश करना कठिन होता है।
45 और 50 साल की उम्र: लगभग असंभव चुनौती
45 की उम्र में अगर कोई व्यक्ति निवेश शुरू करता है, तो उसे ₹1,00,000 हर महीने निवेश करना होगा। वहीं, 50 साल में शुरुआत करने पर यह बोझ दोगुना होकर ₹2,17,000 प्रति माह तक पहुंच जाता है। इस उम्र में बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी, मेडिकल खर्च और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां इतनी बढ़ जाती हैं कि इतनी भारी एसआईपी करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
क्यों हर 5 साल की देरी बढ़ा देती है बोझ?
इसका कारण है कंपाउंडिंग इफेक्ट। जब आप जल्दी निवेश करते हैं, तो आपकी राशि पर ब्याज जुड़ता है और उस ब्याज पर भी आगे ब्याज मिलता है। जितना ज्यादा समय निवेश को मिलेगा, उतना ही पैसा तेजी से बढ़ेगा। लेकिन जब समय कम रह जाता है, तो वही लक्ष्य पाने के लिए आपको अधिक रकम निवेश करनी पड़ती है।
कंपाउंडिंग का जादू: छोटा निवेश, बड़ा रिटर्न
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अगर 25 साल की उम्र से कोई व्यक्ति हर महीने सिर्फ ₹7,800 की एसआईपी करता है और औसत 12% वार्षिक रिटर्न मानें, तो 60 साल की उम्र तक यह रकम ₹5 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
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वहीं अगर यही निवेश 40 साल की उम्र में शुरू किया जाए, तो उतनी ही पूंजी के लिए हर महीने ₹50,500 लगाने होंगे।
यह उदाहरण साफ दिखाता है कि जल्दी निवेश शुरू करना कितना फायदेमंद है।
निवेशकों के लिए जरूरी टिप्स
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जल्दी शुरुआत करें – जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना ही कम बोझ पड़ेगा।
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SIP को ऑटोमेट करें – बैंक खाते से ऑटो-डेबिट सेट करें ताकि निवेश कभी रुके नहीं।
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लॉन्ग-टर्म अप्रोच अपनाएं – बाजार की उतार-चढ़ाव से घबराकर निवेश बंद न करें।
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पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करें – सिर्फ एक फंड पर निर्भर न रहें, अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स चुनें।
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फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें – अपनी आमदनी और खर्चों के आधार पर सही योजना बनवाएं।
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महंगाई का ध्यान रखें – आज के ₹5 करोड़ की वैल्यू 30 साल बाद अलग होगी। इसलिए लक्ष्य बड़ा रखें।
निष्कर्ष
अगर आप चाहते हैं कि 60 साल की उम्र तक आपके पास ₹5 करोड़ का मजबूत रिटायरमेंट फंड हो, तो निवेश में देर बिल्कुल न करें। 25 साल की उम्र में सिर्फ ₹7,800 प्रति माह से शुरुआत की जा सकती है, लेकिन अगर आप 50 की उम्र तक इंतजार करते हैं तो यही लक्ष्य पाने के लिए हर महीने ₹2.17 लाख निवेश करना होगा।
इसलिए सबसे जरूरी है कि युवा अवस्था से ही निवेश की आदत डालें। याद रखिए –
👉 हर 5 साल की देरी, बोझ को दोगुना कर देती है।
