“न Sona और न ही शेयर्स: अमीर लोग पैसा कहां लगाते हैं?” — एक विश्लेषण
परिचय: निवेश की आम धारणाओं को चुनौती
ट्विटर (अब X) पर चार्टर्ड अकाउंटेंट नीतिन कौशिक द्वारा किए गए एक वायरल पोस्ट में यह दावा किया गया कि भारत के सबसे धनी लोग पारंपरिक रूप से लोकप्रिय निवेश—जैसे सोना, शेयर, क्रिप्टो—में नहीं बल्कि “बेहद साधारण लेकिन टिकाऊ” परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। इन परिसंपत्तियों में पार्किंग लॉट्स, कोल्ड स्टोरेज, टोल रोड और वेयरहाउस शामिल हैं।
कौशिक के अनुसार, ये “बोरिंग” निवेश अधिक स्थिर आय उत्पन्न करते हैं, जोखिम कम रखते हैं और टैक्स लाभ देते हैं। उनका यह कथन मीडिया और निवेशकों के बीच तेजी से वायरल हो गया, और कई लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि इसका आधार क्या है, क्या यह रणनीति व्यवहार में सफल हो सकती है, और इसके क्या सीमाएँ हैं।
नीचे हम इस दावे की समीक्षा करेंगे — इसके समर्थन में मौजूद डेटा, इसकी चुनौतियाँ, और सामान्य निवेशकों के लिए क्या सीखने योग्य हो सकता है।
नीतिन कौशिक का तर्क: “खामोश नकदी मशीनें”
कौशिक अपने पोस्ट में यह बताते हैं कि भारत में अमीर लोग अक्सर ऐसे व्यवसायों और परिसंपत्तियों का चयन करते हैं जो प्रतिदिन नकदी उत्पन्न करती हैं और जिनकी मांग स्थिर होती है। उन्होंने इन विशेष क्षेत्रों को उदाहरण स्वरूप पेश किया:
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पार्किंग लॉट्स
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कोल्ड स्टोरेज
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टोल रोड
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वेयरहाउस / गोदाम
उनका तर्क है कि ये व्यवसाय — चाहे बाजार ऊपर जाए या नीचे — हर दिन आय उत्पन्न करते हैं। उदाहरण स्वरूप, एक मेट्रो शहर का पार्किंग लॉट लाखों रुपये मासिक आमदनी दे सकता है, एक टोल प्लाज़ा महत्वपूर्ण राशि हर दिन वसूल कर सकता है, और कोल्ड स्टोरेज तथा वेयरहाउसों की मांग कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ई-कॉमर्स आदि उद्योगों में लगातार बनी रहती है।
टैक्स और वित्तीय लाभ
कौशिक यह भी बताते हैं कि ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर-सम्बद्ध परिसंपत्तियाँ टैक्स लाभ देती हैं — जैसे मूल्यह्रास (depreciation), इनपुट टैक्स क्रेडिट, और अन्य छूटें — जिससे करयोग्य आय कम होती है। इस तरह, अमीर लोग कानूनी ढंग से कर बचत कर सकते हैं, और ये नकदी प्रवाह (cash flow) उन्हें ऋण लेने और विस्तार करने में सक्षम बनाते हैं।
उदाहरण और संकेत
कौशिक ने कुछ उदाहरण भी दिए हैं — जैसे डी-मार्ट (D-Mart) जो गोदामों का उपयोग करता है, या इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ जो टोल परियोजनाएँ चलाती हैं — ये इस विचार को साकार रूप देते हैं कि स्थिर नकदी प्रवाह और लंबी समय अवधि की मांग वाला मॉडल कितना शक्तिशाली हो सकता है।
मीडिया एवं विशेषज्ञों की समीक्षा
इस विषय पर मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञ विश्लेषणों ने कौशिक के दृष्टिकोण को कई दृष्टिकोणों से समर्थन और आलोचना दोनों दी हैं।
समर्थन: “बोरिंग” व्यापार मॉडल की शक्ति
Business Today की एक रिपोर्ट इस विचार को विस्तार से प्रस्तुत करती है कि भारत में अमीर लोग अक्सर “boring cash machines” यानी रोज-रोज नकदी देने वाले मॉडल पसंद करते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि बैंक ऐसे व्यवसायों को वित्तीय सहायता देने में सहज होते हैं क्योंकि नकदी प्रवाह अनुमाननीय और स्थिर होता है।
रिपोर्ट में यह उदाहरण दिया गया है कि एक मेट्रो शहर का पार्किंग लॉट प्रतिमाह ₹25–30 लाख तक की आमदनी दे सकता है, और 10,000 वर्ग फुट का कोल्ड स्टोरेज ₹8–12 लाख तक मासिक किराया ला सकता है। इसके अलावा, टोल प्लाज़ा दैनिक ₹10–15 लाख तक राजस्व जुटा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स यह भी जोड़ती हैं कि ऐसे हावी रहने वाले व्यवसायों में कम प्रतियोगिता होती है और प्रवेश बाधाएँ अधिक होती हैं — एक बार स्थापित हो जाने पर उनका सुरक्षित और दीर्घकालीन व्यवसाय मॉडल बन जाता है।
आलोचनाएँ एवं सावधानियाँ
हालाँकि यह अवधारणा आकर्षक है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिम और चुनौतियाँ भी हैं:
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उच्च आरंभिक पूँजी आवश्यकता
पार्किंग लॉट, कोल्ड स्टोरेज, टोल प्लाज़ा आदि स्थापित करने के लिए बहुत बड़ी शुरुआती पूँजी चाहिए होती है — जमीन, निर्माण, उपकरण, लाइसेंस एवं नियामक मंजूरियाँ आदि। छोटे निवेशकों के लिए यह बाधा हो सकती है। -
नियामक और लाइसेंस चुनौतियाँ
टोल परियोजनाएं या बड़े गोदाम इन्फ्रास्ट्रक्चर व्यवसायों में सरकार की स्वीकृति, भूमि उपयोग परमिट, पर्यावरण अनुमतियाँ आदि कई संस्थागत बाधाएँ होती हैं। -
क्षेत्रीय और बाजार जोखिम
यदि स्थान चयन सही न हो (उदाहरणस्वरूप, कम आवागमन वाला इलाका), तो पार्किंग और टोल जैसे मॉडल ठप हो सकते हैं। या फिर मौसम, परिवहन नीतियाँ, नई सड़क योजना आदि बदल सकती हैं। -
प्रबंधन और परिचालन जोखिम
कोल्ड स्टोरेज या गोदाम चलाने में तकनीकी दक्षता, रख-रखाव खर्च, बिजली और कूलिंग लागत, श्रम प्रबंधन आदि पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। -
धारणा की सामान्यता
यह मॉडल हर जगह सफल नहीं होगा। भारत के छोटे शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों में कार पार्किंग या टोल मॉडल की मांग कम हो सकती है।
इसलिए, यह रणनीति “सभी के लिए उपयुक्त” नहीं है — बल्कि उन लोगों के लिए अधिक व्यवहार्य हो सकती है जिनके पास संसाधन, नेटवर्क, और धैर्य हो।
इस रणनीति से सीखने योग्य बिंदु (Insights) और निवेशकों के लिए सुझाव
यदि आप एक निवेशक हैं और इस विचार से प्रेरित हैं, तो निम्नलिखित बिंदु ध्यान देने लायक हैं:
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पहले से अध्ययन करें और पायलट करें
बड़े पैमाने पर शुरू करने से पहले एक पायलट (छोटा मॉडल) शुरू करें। उदाहरणतः एक छोटा गोदाम या पार्किंग स्थल मुहावरों में चलाकर देखें। -
स्थान का चयन बेहद महत्वपूर्ण है
ऐसी जगह चुनें जहां मांग स्थिर हो — मेट्रो क्षेत्र, हाईवे किनारे, कृषि मंडियों के पास आदि। -
वित्त एवं ऋण संरचना समझें
चूंकि नकदी प्रवाह अपेक्षाकृत स्थिर होगा, ऋण लेना आसान हो सकता है — लेकिन यह सुनिश्चित करें कि ब्याज और मासिक देनदारी नकदी प्रवाह को न दबाए। -
टैक्स और नियामक फायदे एवं बाधाएं समझें
किसी व्यवसाय या क्षेत्र में निवेश करने से पहले उस क्षेत्र की कर छूट, सब्सिडी या नियामक प्रावधानों की पूरी जानकारी ले लें। -
लंबी अवधि का दृष्टिकोण रखें
इस तरह की परिसंपत्तियाँ तुरंत भारी रिटर्न नहीं देतीं, बल्कि समय के साथ स्थिर आय और मूल्य वृद्धि की संभावना देती हैं। -
रख-रखाव और प्रबंधन पर ध्यान दें
गोदामों, कोल्ड स्टोर्स आदि में मशीनरी, शीतलन इकाइयाँ, रख-रखाव आदि की नियमित लागत और प्रबंधन महत्वपूर्ण है। -
विविधीकरण (Diversification)
यह रणनीति आपके समग्र निवेश पोर्टफोलियो की एक घटक हो सकती है — सब कुछ इस तरह की “बोरिंग” परिसंपत्तियों में न बाँधें। शेयर, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट आदि को भी समेटे रखना बेहतर हो सकता है।
निष्कर्ष: क्या यह एक “गोल्डन फार्मूला” है?
नीतिन कौशिक के इस तर्क में सशक्त बिंदु हैं — स्थिर नकदी प्रवाह, टैक्स लाभ, और वित्तीय समर्थन। मीडिया रिपोर्ट्स और अनुभव बताते हैं कि कुछ अमीर परिवार और कंपनियाँ वास्तव में इस तरह की “बोरिंग” परिसंपत्तियों के माध्यम से अपनी संपत्ति का विस्तार करती हैं।
लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि हर निवेश की तरह इसमें भी जोखिम और चुनौतियाँ हैं — विशेष रूप से पूँजी की आवश्यकता, स्थान चयन, परिचालन प्रबंधन और नियामक बाधाएँ।
अतः, यदि आप इस विचार को अपनाना चाहें, तो सावधानी पूर्वक योजना बनाएं, छोटे स्तर पर परीक्षण करें और अपने पोर्टफोलियो को विविध रखें।
