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21 Jan 2026, Wed

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ (1 से 15 नवंबर 2025) के आयोजन की घोषणा की है

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ (1 से 15 नवंबर 2025) के आयोजन की घोषणा की है, जो भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और योगदान को सम्मान देने का एक राष्ट्रीय अभियान है। यह आयोजन ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ के भव्य समापन के साथ-साथ भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

इस दो-सप्ताह के राष्ट्रीय उत्सव का उद्देश्य है — भारत के जनजातीय नायकों की अदम्य भावना, उनके ऐतिहासिक योगदान और सांस्कृतिक विविधता को जन-जन तक पहुँचाना।


🌿 जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा — एक राष्ट्रीय उत्सव

1 से 15 नवंबर 2025 तक मनाए जाने वाले इस ‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ का आयोजन जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRIs), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRSs), ट्राइफेड (TRIFED) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (NSTFDC) के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।

इस पहल का मकसद है —
भारत की जनजातीय समुदायों की गौरवशाली विरासत, उनके सामाजिक योगदान और स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका को सम्मान देना, ताकि देश के नागरिक उनके समृद्ध इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकें।


🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण

यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से प्रेरित है, जिसमें वे लगातार भारत के जनजातीय नायकों और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की बात करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कई बार कहा है कि भारत की आत्मा उसकी जनजातीय जड़ों और विविध परंपराओं में बसती है।

इसी दृष्टिकोण के तहत केंद्र सरकार ने 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित किया था — जो भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
अब यह पखवाड़ा उसी विरासत को और व्यापक रूप में मनाने का माध्यम बनेगा।


🎯 पखवाड़े के उद्देश्य

‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ का मुख्य उद्देश्य केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों की पहचान और गौरव को राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बनाना है।
इसके मुख्य लक्ष्य हैं —

  • भारत के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को सम्मान देना और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना।

  • जनजातीय कला, संस्कृति, लोककथाओं और धरोहर के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाना।

  • एकता, सांस्कृतिक गर्व और जनजागरूकता को प्रोत्साहित करना।

  • देशभर के जनजातीय विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नेतृत्व और सहभागिता की भावना को सशक्त करना।


🏫 देशभर में 497 EMRSs में उत्सव का आयोजन

जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा के दौरान देश के 497 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRSs) में विशेष गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
करीब 1.5 लाख जनजातीय विद्यार्थी इसमें भाग लेंगे, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का प्रतिनिधित्व करेंगे।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना भी है।


🎨 प्रमुख गतिविधियाँ और आयोजन

पखवाड़े के दौरान EMRSs में कई रचनात्मक और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियाँ होंगी, जिनमें शामिल हैं —

  • पदयात्राएँ (Marches): विद्यार्थियों द्वारा एकता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता का संदेश फैलाने के लिए आयोजित की जाएँगी।

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: जनजातीय परंपराओं, नृत्यों और लोककथाओं पर आधारित विशेष कार्यक्रम।

  • प्रदर्शनियाँ: जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों, पारंपरिक कलाओं और धरोहरों को प्रदर्शित करने के लिए।

  • कला और कहानी प्रतियोगिताएँ: विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर देने हेतु।

  • कार्यशालाएँ और चर्चाएँ: नवाचार, स्थिरता और जनजातीय नेतृत्व पर केंद्रित सत्र।

  • सम्मान समारोह: सर्वश्रेष्ठ गतिविधियाँ आयोजित करने वाले विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि उनके भीतर अपनी जनजातीय पहचान और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना भी सशक्त होगी।


🙏 भगवान बिरसा मुंडा — ‘धरती आबा’ को श्रद्धांजलि

यह पखवाड़ा 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर समाप्त होगा।
बिरसा मुंडा, जिन्हें ‘धरती आबा’ (पृथ्वी के पिता) कहा जाता है, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उलगुलान आंदोलन (जनविद्रोह) का नेतृत्व किया और जनजातीय समाज के अधिकारों के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

उनका जीवन संघर्ष, साहस और आत्मबलिदान का प्रतीक है।
उनकी जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएँगी, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके।


🏛️ NESTS और EMRSs की भूमिका

राष्ट्रीय जनजातीय विद्यार्थी शिक्षा सोसाइटी (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है जो एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRSs) का संचालन करती है।
इन विद्यालयों का उद्देश्य है —

  • जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना,

  • संस्कृति और परंपरा का संरक्षण करना,

  • और आधुनिक कौशलों से लैस करके आत्मनिर्भर बनाना

‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ जैसी पहलें इन विद्यार्थियों को “विकसित भारत” (Viksit Bharat) के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करती हैं।


🌺 जनजातीय गौरव — भारत की आत्मा

भारत की जनजातियाँ सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन, सामुदायिक जीवन और समानता के मूल्यों पर आधारित जीवन जीती रही हैं।
उनकी कला, संगीत, शिल्प और परंपराएँ हमारी राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।

‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ इन परंपराओं को पुनर्जीवित करने का अवसर है — ताकि हर भारतीय यह समझ सके कि जनजातीय समाज केवल अतीत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की प्रेरणा भी है।


🌏 निष्कर्ष

‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 2025’ भारत की आत्मा, संस्कृति और समरसता का उत्सव है।
यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आभार प्रकट करने की पहल है — उन जनजातीय नायकों के प्रति जिन्होंने भारत के स्वाभिमान की नींव रखी।

“जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा — भारत की जड़ों, जननायकों और सांस्कृतिक धरोहर को सलाम।” 🌿🇮🇳

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