Patna Metro: पटना मेट्रो प्रोजेक्ट ऑफिस में लगी आग, कई अहम दस्तावेज जलकर राख
पटना मेट्रो प्रोजेक्ट के अस्थाई कार्यालय में रविवार शाम आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। यह घटना मोइनुल हक स्टेडियम परिसर में स्थित मेट्रो प्रोजेक्ट के गेट नंबर 1 कार्यालय की है, जहां अचानक धुआं उठता देख कर्मचारियों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की लगभग 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब 40 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग की आशंका
फायर अफसर गयानंद सिंह के अनुसार, आग लगने की प्राथमिक वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पटना सिटी, कंकड़बाग और लोदीपुर से एक दर्जन फायर ब्रिगेड यूनिट्स को मौके पर भेजा गया। सभी यूनिटों ने मिलकर आग को फैलने से रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई की। हालांकि, अभी तक आग लगने के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, बहादुरपुर थाना प्रभारी रंजन कुमार ने बताया कि “मेट्रो प्रोजेक्ट के ऑफिस में आग लगी थी, लेकिन अभी तक किसी तरह की लिखित शिकायत थाने में दर्ज नहीं कराई गई है।”
अस्थाई कार्यालय में रखा सारा सामान जलकर खाक
मिली जानकारी के अनुसार, आग लगने की यह घटना शाम करीब 6:35 बजे हुई, जब कार्यालय में सीमित संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। आग लगते ही लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन को सूचना दी। बताया जा रहा है कि आग ने देखते ही देखते पूरे अस्थाई ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।
कार्यालय में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, फाइलें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। यह दस्तावेज मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण और योजना से संबंधित बताए जा रहे हैं। इससे परियोजना की प्रशासनिक प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
दमकल विभाग की तेज कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
घटना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना दौरे और प्रस्तावित रोड शो के चलते शहर पहले से ही अलर्ट पर था। इसी वजह से फायर डिपार्टमेंट ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और 10 दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।
करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने मेट्रो ऑफिस के पास स्थित अन्य अस्थाई ढांचों को भी सुरक्षित कर लिया, जिससे आग के फैलने की संभावना समाप्त हो गई।
फायर अधिकारियों ने बताया कि यदि आग बुझाने में थोड़ी भी देर होती, तो नुकसान और ज्यादा हो सकता था क्योंकि आसपास के क्षेत्र में कई अस्थाई संरचनाएं लकड़ी और टिन से बनी हैं।
पटना मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति पर असर की आशंका
पटना मेट्रो प्रोजेक्ट बिहार की राजधानी की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करना और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
इस आग की घटना से परियोजना की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं में अस्थायी रुकावट आ सकती है, क्योंकि कार्यालय में कई अहम योजनागत और प्रगति से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे।
हालांकि, मेट्रो प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी जरूरी दस्तावेजों का डिजिटल बैकअप मौजूद है, जिससे नुकसान की भरपाई की जा सकेगी और निर्माण कार्यों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्थानीय प्रशासन और मेट्रो टीम ने शुरू की जांच
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और फायर डिपार्टमेंट की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया और नुकसान का आकलन शुरू किया है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना पर बल दिया गया है, लेकिन फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि आग के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सके।
इसके अलावा, मेट्रो प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने कहा है कि आगे से इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए अग्नि सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा, जैसे कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, अग्निशामक यंत्रों की संख्या में वृद्धि और बिजली के तारों की नियमित जांच।
स्थानीय लोगों में चिंता, सुरक्षा को लेकर सवाल
घटना के बाद आसपास के लोगों में चिंता का माहौल है। चूंकि मेट्रो प्रोजेक्ट का यह अस्थाई कार्यालय शहर के बीचोंबीच स्थित है, इसलिए स्थानीय नागरिकों ने सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स में भी अगर इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं, तो यह गंभीर सुरक्षा लापरवाही का संकेत है।
निष्कर्ष: सतर्कता और सुरक्षा की दोहरी जरूरत
पटना मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाएं राज्य की प्रगति के लिए बेहद जरूरी हैं, लेकिन इनके प्रबंधन में सुरक्षा मानकों का पालन समान रूप से आवश्यक है। इस आग की घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि तकनीकी लापरवाही या छोटे शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाएं भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं।
अब देखना यह होगा कि मेट्रो प्रशासन और राज्य सरकार इस घटना से क्या सबक लेती है और भविष्य में सुरक्षा प्रोटोकॉल को किस तरह सुदृढ़ करती है। फिलहाल राहत की बात यही है कि किसी जनहानि की सूचना नहीं है और आग पर समय रहते काबू पा लिया गया।
