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21 Jan 2026, Wed

झारखंड के ‘राजभवन’ का नाम अब ‘लोक भवन’: केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी

झारखंड के ‘राजभवन’ का नाम अब ‘लोक भवन’: केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए झारखंड के रांची और दुमका स्थित राजभवन (Raj Bhavan) का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर अब ‘लोक भवन’ (Lok Bhavan) कर दिया है। केंद्र सरकार के पत्र संख्या–7/10/2025 (Part)-M&G दिनांक 25 नवंबर 2025 और माननीय राज्यपाल झारखंड की स्वीकृति के आधार पर यह निर्णय आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही, भविष्य में सभी सरकारी कार्यों, दस्तावेजों, संचार और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए “राजभवन, झारखंड” के स्थान पर अब “लोक भवन, झारखंड” का प्रयोग किया जाएगा।

नाम परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?

किसी भी राज्य के राजभवन को पारंपरिक रूप से राज्यपाल निवास एवं प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में जाना जाता है। “राजभवन” नाम अंग्रेज़ी शासनकाल और उसके बाद से चला आ रहा था।
अब इसे ‘लोक भवन’ नाम देने का तात्पर्य है कि यह स्थान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि जनसंपर्क, जनभागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बने।

“लोक” शब्द सीधे जनता और लोकतंत्र से जुड़ा हुआ है। यह संकेत देता है कि राज्यपाल कार्यालय जनता के प्रति अधिक खुला, संवादाधारित और लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने वाला केंद्र बनेगा। सरकार द्वारा इस बदलाव को एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

किन परिसरों का नाम बदला गया है?

अधिसूचना के अनुसार:

रांची स्थित राजभवन → अब लोक भवन, झारखंड

दुमका स्थित राजभवन परिसर → अब आधिकारिक रूप से लोक भवन कहलाएगा

इस बदलाव के साथ सभी विभागों, मंत्रालयों और सरकारी रिकॉर्ड में नए नाम का उपयोग अनिवार्य हो गया है।

अधिसूचना का मुख्य अंश (सरल भाषा में)

जारी सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि:

झारखंड राज्यपाल की स्वीकृति और गृह मंत्रालय की संस्तुति के आधार पर रांची एवं दुमका स्थित राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया जाता है।

यह नाम परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

सभी आधिकारिक प्रयोजनों के लिए भविष्य में “राजभवन, झारखंड” की जगह “लोक भवन, झारखंड” लिखा और बोला जाएगा।

इस क्षेत्र में इससे संबंधित सभी सरकारी दस्तावेजों, वेबसाइटों, शिलापट्ट, सार्वजनिक सूचना बोर्डों और आधिकारिक पत्राचार में बदलाव किए जाएंगे।

इस परिवर्तन का व्यापक प्रभाव

1. प्रशासनिक स्तर पर बदलाव

इस परिवर्तन के बाद सभी सरकारी विभाग — विशेषकर राजभवन से जुड़े विभाग — अपने प्रपत्र, लेटरहेड, आधिकारिक वेबसाइट और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट करेंगे। इससे प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता और स्पष्टता आएगी।

2. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धारा में बदलाव

झारखंड में पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्यपाल निवास को ‘राजभवन’ की जगह लोक भवन नाम दिया गया है। यह राजनीतिक इतिहास में एक नई शुरुआत है जो शासन को अधिक “जन-केंद्रित” दिखाता है।

3. जनता के बीच सकारात्मक संदेश

लोक भवन शब्द का अर्थ है — जनता का भवन, यानी जनता से जुड़ा स्थान।
इससे लोगों में यह संदेश जाता है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है, और प्रशासन उनकी भागीदारी को सर्वोपरि मानता है।

4. मीडिया और जनप्रतिनिधियों की बढ़ी भूमिका

नई नीति के अनुसार, लोक भवन का उपयोग कई लोकहित गतिविधियों, बैठकों और संवादों के लिए पहले की तुलना में अधिक खुला हो सकता है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक संवाद और मजबूत होगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

हालांकि यह निर्णय प्रशासनिक है, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव भी देखा जा रहा है। कई जानकार इसे राज्य की लोकतांत्रिक छवि को मजबूत करने वाला कदम मान रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नाम सामाजिक-राजनीतिक संदेश देने का तरीका भी हो सकता है, जिसमें जनता की भूमिका को सर्वोपरि दर्शाया गया है।

वहीं, सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार अगर लोक भवन को अधिक जनोपयोगी बनाए तो यह निर्णय प्रभावी साबित होगा। समय के साथ यह भी देखा जाएगा कि इस नाम परिवर्तन का व्यवहारिक उपयोग कितना व्यापक और उपयोगी बन पाता है।

यह बदलाव कब से लागू हुआ?

अधिसूचना के अनुसार, नाम परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है।
यानी अब से सभी सरकारी दस्तावेज़ों और संचार में केवल लोक भवन, झारखंड लिखा जाएगा।

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