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21 Jan 2026, Wed

Babri Masjid: मस्जिद के शिलान्यास में सऊदी अरब के मौलवियों की भागीदारी, तैयारियों में जुटा ट्रस्ट

Babri Masjid: मस्जिद के शिलान्यास में सऊदी अरब के मौलवियों की भागीदारी, तैयारियों में जुटा ट्रस्ट

Babri Masjid: मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मस्जिद शिलान्यास की तैयारियाँ तेज़, सऊदी अरब के मौलवियों की संभावित मौजूदगी

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा क्षेत्र में प्रस्तावित एक मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज़ हो गई है। यह कार्यक्रम 6 दिसंबर को आयोजित किया जाना है, जिसमें सऊदी अरब से मौलवियों (क़ाज़ियों) की संभावित मौजूदगी की बात कही गई है। आयोजन का नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर कर रहे हैं, जिन्हें हाल ही में पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत निलंबित किया है।

कार्यक्रम स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियाँ चल रही हैं और आयोजकों के अनुसार, हज़ारों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बेलडांगा के मोरादघी इलाके के पास लगभग 25 बीघा ज़मीन पर मस्जिद के शिलान्यास का कार्यक्रम प्रस्तावित है। हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि इस कार्यक्रम में लगभग तीन लाख लोगों के जुटने की संभावना है। उनके अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों से धार्मिक नेता आयोजन में शामिल होंगे।

कबीर ने यह भी कहा कि मस्जिद का स्वरूप “Babri Masjid स्टाइल” से प्रेरित होगा, हालांकि उन्होंने इसके वास्तु या डिजाइन से जुड़ा कोई विस्तृत विवरण सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं किया है।


सऊदी अरब से मौलवियों की संभावित भागीदारी

हुमायूं कबीर ने दावा किया कि सऊदी अरब से दो क़ाज़ी विशेष रूप से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। उनके मुताबिक, ये क़ाज़ी शनिवार सुबह कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचेंगे और विशेष काफ़िले के ज़रिये कार्यक्रम स्थल तक लाए जाएंगे।

इस जानकारी के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। आयोजन स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (NH-12) के किनारे स्थित है, जो उत्तर-दक्षिण दिशा में राज्य का एक प्रमुख मार्ग है। ऐसे में ट्रैफ़िक और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन के लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती मानी जा रही है।


खाने-पीने की भव्य व्यवस्था

कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों के लिए बड़े पैमाने पर भोजन की व्यवस्था की गई है। आयोजन से जुड़े एक करीबी सहयोगी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि —

  • 40,000 खाने के पैकेट विशेष अतिथियों और दूर-दराज़ से आने वाले लोगों के लिए तैयार किए जा रहे हैं

  • 20,000 पैकेट स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के निवासियों के लिए होंगे

  • भोजन की ज़िम्मेदारी मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को दी गई है

बताया गया है कि अकेले भोजन पर 30 लाख रुपये से अधिक का खर्च अनुमानित है, जबकि पूरे आयोजन का बजट लगभग 60 से 70 लाख रुपये के बीच हो सकता है। इन पैकेटों में “शाही बिरयानी” शामिल होने की बात कही जा रही है।


टीएमसी का रुख: ‘बार-बार शर्मिंदगी’

तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट रुख अपनाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, हुमायूं कबीर के बयान और गतिविधियाँ संगठन के लिए कई बार शर्मिंदगी का कारण बन चुकी हैं।

टीएमसी नेतृत्व का मानना है कि कबीर ने पार्टी लाइन और अनुशासन की अनदेखी की, जिसके चलते उन्हें गुरुवार को निलंबित किया गया। पार्टी यह संकेत देना चाहती है कि इस कार्यक्रम का कोई आधिकारिक राजनीतिक समर्थन नहीं है।

गौरतलब है कि हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफ़र भी उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। वे पहले कांग्रेस और भाजपा से जुड़े रह चुके हैं, इसके बाद टीएमसी में शामिल हुए थे।


कबीर का बयान: दबाव से बेपरवाह

निलंबन और राजनीतिक आलोचना के बावजूद हुमायूं कबीर अपने कार्यक्रम को लेकर पीछे हटते नज़र नहीं आ रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे “किसी प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव से नहीं डरते” और कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार होगा।

उनका दावा है कि यह एक धार्मिक आयोजन है और इसका उद्देश्य आस्था से जुड़ा है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना।


सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौती

इतनी बड़ी भीड़, अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की संभावित मौजूदगी और संवेदनशील तारीख (6 दिसंबर) को देखते हुए प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से सुरक्षा योजना का पूरा विवरण साझा नहीं किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक:

  • आयोजन स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती

  • ट्रैफ़िक डायवर्जन की संभावित योजना

  • भीड़ नियंत्रण और ड्रोन निगरानी जैसे विकल्प

पर विचार किया जा रहा है।


निष्कर्ष

बेलडांगा में प्रस्तावित मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। सऊदी अरब के मौलवियों की संभावित भागीदारी, विशाल भीड़ का दावा और करोड़ों रुपये के इंतज़ाम इस कार्यक्रम को असाधारण बनाते हैं।

हालांकि, आने वाले दिनों में यह साफ़ हो पाएगा कि प्रशासनिक अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस आयोजन को किस दिशा में ले जाती हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें 6 दिसंबर पर टिकी हैं।

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