अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) एक बार फिर अपने विवादित बयानों की वजह से जबरदस्त आलोचना के घेरे में आ गए हैं। इस बार मामला मास इमिग्रेशन (बड़े पैमाने पर प्रवासन) से जुड़ा है, लेकिन विवाद सिर्फ नीति तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी भारतीय मूल की पत्नी ऊषा वेंस और उनके बच्चों को भी इस बहस में घसीट लिया, जिसके बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।
दरअसल, जेडी वेंस ने हाल ही में इमिग्रेशन को लेकर एक सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “मास माइग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी है”। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने वेंस पर पाखंड, दोहरे मापदंड और जेनोफोबिया (विदेशियों से डर या नफरत) जैसे आरोप लगाए।
इमिग्रेशन को बताया ‘अमेरिकन ड्रीम की चोरी’
जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन ने अमेरिकी नागरिकों से रोजगार के मौके छीन लिए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इमिग्रेशन के फायदों पर किए जा रहे अध्ययन उन्हीं संस्थाओं द्वारा फंड किए जाते हैं, जो मौजूदा सिस्टम से लाभ उठाती हैं।
वेंस का कहना था कि अवैध और अनियंत्रित इमिग्रेशन से अमेरिकी श्रमिकों की मजदूरी घट रही है और सामाजिक असंतुलन बढ़ रहा है। हालांकि यह बयान उनके समर्थकों को पसंद आया, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने इसे कठोर और विभाजनकारी सोच करार दिया।
सोशल मीडिया पर पलटा हमला, पत्नी और बच्चों को लेकर कटाक्ष
वेंस के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूज़र्स ने उनके बयान को दोहरा रवैया बताते हुए उनकी पत्नी ऊषा वेंस की पृष्ठभूमि का हवाला दिया।
एक यूजर ने ट्वीट को कोट करते हुए लिखा,
“अगर आप इमिग्रेशन के इतने खिलाफ हैं, तो आपको खुद उदाहरण पेश करना होगा। ऊषा, उनकी भारतीय फैमिली और अपने बाइरेशियल बच्चों को भारत भेजिए। टिकट कब बुक कर रहे हैं, हमें बताइए।”
इस तरह की सैकड़ों टिप्पणियों से वेंस का टाइमलाइन भर गया। आलोचकों का कहना है कि जब खुद वेंस का परिवार अप्रवासी पृष्ठभूमि से जुड़ा है, तो इमिग्रेशन को अमेरिकी सपने की ‘चोरी’ कहना नैतिक रूप से गलत है।
ऊषा वेंस को लेकर पुराना विवाद फिर चर्चा में
यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी जेडी वेंस अपनी पत्नी ऊषा वेंस को लेकर दिए गए एक बयान के कारण आलोचना झेल चुके हैं। कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में वेंस ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी, जो हिंदू परिवार में पैदा हुई थीं, एक दिन ईसाई धर्म अपना सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि ऊषा उनके साथ चर्च जाती हैं और वे चाहते हैं कि वह उनके ईसाई विश्वास को साझा करें। इस बयान पर हिंदू-अमेरिकी संगठनों और धार्मिक स्वतंत्रता समर्थकों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
बाद में वेंस को सफाई देनी पड़ी कि उनकी पत्नी का धर्म बदलने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन तब तक यह बहस शुरू हो चुकी थी कि क्या वेंस का रूढ़िवादी और श्वेत-राष्ट्रवादी समर्थन आधार ऊषा वेंस को अमेरिका की सेकंड लेडी के रूप में पूरी तरह स्वीकार करता है या नहीं।
H-1B वीज़ा और भारतीय मूल पर बढ़ा तनाव
हालिया इमिग्रेशन बहस में खासतौर पर H-1B वीज़ा को लेकर भी तनाव देखा गया है। यह वीज़ा बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स को अमेरिका में काम करने का मौका देता है।
जेडी वेंस लगातार यह दावा करते रहे हैं कि प्रवासी अमेरिकी श्रमिकों की नौकरियां छीन रहे हैं और उनकी सैलरी पर दबाव डाल रहे हैं। मिसिसिपी में आयोजित Turning Point USA कार्यक्रम में भी उन्होंने कहा था कि इमिग्रेशन से स्थानीय श्रमिकों को नुकसान हो रहा है।
हालांकि इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप खुद वेंस से थोड़े अलग नजर आते हैं। हाल ही में ट्रंप ने H-1B वीज़ा को लेकर कहा था कि अमेरिका में हर क्षेत्र में पर्याप्त टैलेंट उपलब्ध नहीं है, इसलिए बाहर से कुशल लोगों को लाना जरूरी है।
ICE और निर्वासन पर भी सख्त रुख
एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में जब वेंस से पूछा गया कि क्या ट्रंप प्रशासन सभी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने की योजना बना रहा है, तो उन्होंने कहा,
“हम जितने संभव हों, उतनों को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।”
इसके बाद अमेरिका में ICE (Immigration and Customs Enforcement) की कार्रवाइयों को लेकर डर का माहौल बढ़ गया है। कई इलाकों में घर-घर जांच की खबरें सामने आई हैं।
इस पर न्यूयॉर्क के मेयर-इलेक्ट जोहरान ममदानी ने लोगों से अपील की कि वे डरें नहीं, अधिकारियों से संवाद करें और स्थिति को शांति से संभालें।
निष्कर्ष
जेडी वेंस का इमिग्रेशन पर सख्त रुख भले ही उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हो, लेकिन जिस तरह से उनके बयान को उनकी पत्नी ऊषा वेंस और बच्चों से जोड़कर देखा जा रहा है, उसने इस बहस को नीति से आगे, पहचान और स्वीकार्यता के मुद्दे में बदल दिया है।
