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20 Jan 2026, Tue

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन विवाद का ऑन-द-स्पॉट फैसला, 15 दिन में सुधरेगी जमाबंदी; डिप्टी सीएम खुद लेंगे CO की क्लास

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन विवाद का ऑन-द-स्पॉट फैसला, 15 दिन में सुधरेगी जमाबंदी; डिप्टी सीएम खुद लेंगे CO की क्लास

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन विवाद का ऑन-द-स्पॉट फैसला, 15 दिन में सुधरेगी जमाबंदी; डिप्टी सीएम खुद लेंगे CO की क्लास

बिहार में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। जमाबंदी में गड़बड़ी, नामांतरण में देरी, खाता–खेसरा की त्रुटियाँ और वर्षों तक चलने वाले मुकदमे—इन सबका असर सीधे किसानों, आम नागरिकों और निवेश माहौल पर पड़ता है। अब राज्य सरकार ने इस समस्या के तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

राज्य सरकार ने Bihar Bhumi पोर्टल और प्रशासनिक सुधारों के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीन विवाद का ऑन-द-स्पॉट फैसला होगा और जमाबंदी सुधार 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इतना ही नहीं, व्यवस्था में ढिलाई बरतने वाले अंचल अधिकारियों (CO) की क्लास खुद डिप्टी सीएम लेंगे।


क्या है नई व्यवस्था?

नई पहल के तहत जमीन से जुड़े मामलों को लंबित रखने की बजाय मौके पर ही निपटाने पर जोर दिया गया है। प्रशासनिक अमले को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि—

  • शिकायत मिलते ही स्थल निरीक्षण किया जाए

  • उपलब्ध रिकॉर्ड (खाता, खेसरा, नक्शा) का तुरंत मिलान हो

  • स्पष्ट मामलों में तुरंत आदेश पारित किया जाए

  • 15 दिन के भीतर जमाबंदी सुधार सुनिश्चित हो

इससे न केवल मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।


डिप्टी सीएम की सख्ती: CO की होगी जवाबदेही तय

इस पूरी व्यवस्था की निगरानी खुद बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि जमीन विवादों में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • जिन अंचलों में शिकायतें लंबित रहेंगी, वहाँ के CO से सीधे जवाब लिया जाएगा

  • अनावश्यक देरी या गलत आदेश पर कार्रवाई तय है

  • नियमित समीक्षा बैठकें होंगी, जिनमें प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन होगा

इस कदम से जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।


Bihar Bhumi पोर्टल की भूमिका

Bihar Bhumi पोर्टल इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ बनकर उभरा है। इस पोर्टल के माध्यम से—

  • खाता, खेसरा, जमाबंदी जैसी भूमि जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध

  • नामांतरण और सुधार से जुड़े आवेदन ट्रैकिंग

  • रिकॉर्ड में सुधार की स्थिति की डिजिटल मॉनिटरिंग

डिजिटलीकरण से मनमानी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी तथा आम नागरिक को रियल-टाइम अपडेट मिलेगा।


आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?

इस नई व्यवस्था से नागरिकों को कई स्तरों पर राहत मिलेगी—

1. त्वरित न्याय

सालों तक चलने वाले विवाद अब दिनों–हफ्तों में सुलझेंगे

2. आर्थिक राहत

वकीलों, दलालों और अनावश्यक खर्च से मुक्ति मिलेगी।

3. पारदर्शिता

ऑनलाइन रिकॉर्ड और तय समय-सीमा से प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह बनेगी।

4. निवेश और विकास

भूमि रिकॉर्ड स्पष्ट होने से निवेश, आवास और आधारभूत परियोजनाओं को गति मिलेगी।


प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में विकास की राह में भूमि विवाद सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है। सरकार का यह कदम—

  • Ease of Doing Business को बेहतर करेगा

  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विश्वास बहाल करेगा

  • न्यायालयों पर बोझ कम करेगा

साथ ही, यह संदेश भी देगा कि सरकार नीतियाँ बनाने के साथ-साथ क्रियान्वयन पर भी उतनी ही गंभीर है।


किन मामलों में होगा ऑन-द-स्पॉट फैसला?

  • स्पष्ट मालिकाना हक वाले जमाबंदी विवाद

  • रिकॉर्ड में नाम/एरिया की त्रुटियाँ

  • पारिवारिक बंटवारे से जुड़े सरल मामले

  • ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में मेल वाले केस

जटिल मामलों को नियमानुसार उच्च स्तर पर भेजा जाएगा, लेकिन अनावश्यक अटकाव नहीं होगा


मुख्य बिंदु (संक्षेप में)

  • बिहार में जमीन विवाद का ऑन-द-स्पॉट निपटारा

  • 15 दिन में जमाबंदी सुधार अनिवार्य

  • Bihar Bhumi पोर्टल से डिजिटल निगरानी

  • डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की सीधी मॉनिटरिंग

  • लापरवाही पर CO के खिलाफ सख्त कार्रवाई


निष्कर्ष

बिहार सरकार की यह पहल जमीन विवादों के समाधान में गेम चेंजर साबित हो सकती है। ऑन-द-स्पॉट फैसले, तय समय-सीमा, डिजिटल निगरानी और शीर्ष स्तर की सख्ती—ये सभी मिलकर उस समस्या को जड़ से खत्म करने की कोशिश हैं, जिसने दशकों तक आम लोगों को परेशान किया है।

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