Ikkis First Review: धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ ने किया भावुक, स्क्रीनिंग में रो पड़े बॉबी–सनी देओल
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में सिर्फ कहानियों के लिए नहीं, बल्कि भावनाओं और विरासत के लिए याद रखी जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म बनकर उभर रही है इक्कीस, जिसे दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म बताया जा रहा है। फिल्म की पहली प्राइवेट स्क्रीनिंग के बाद सामने आया रिव्यू न सिर्फ तारीफों से भरा है, बल्कि इसने देओल परिवार और दर्शकों—दोनों को भावुक कर दिया।
स्क्रीनिंग के दौरान बॉबी देओल और सनी देओल की आंखें नम हो गईं—यह पल अपने आप में इस फिल्म के असर को बयां करता है।
पहली स्क्रीनिंग में क्या हुआ?
मुंबई में आयोजित एक सीमित स्क्रीनिंग में ‘इक्कीस’ को परिवार और करीबी लोगों के लिए दिखाया गया। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ी, भावनाओं का सैलाब साफ दिखा।
धर्मेंद्र का पर्दे पर संयमित, गहराई से भरा और गरिमामय अभिनय देखकर बॉबी और सनी देओल खुद को रोक नहीं पाए। स्क्रीनिंग खत्म होते ही माहौल कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गया—और फिर तालियों की गूंज के साथ भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
सूत्रों के मुताबिक, बॉबी देओल ने कहा कि यह फिल्म “पापा के करियर की आत्मा” को समेटे हुए है, जबकि सनी देओल ने इसे “एक युग का खूबसूरत विदाई-पत्र” बताया।
Ikkis: कहानी और टोन का संकेत
हालांकि मेकर्स ने कहानी के कई पहलुओं को अभी गोपनीय रखा है, लेकिन शुरुआती रिव्यू से इतना साफ है कि ‘इक्कीस’ एक इमोशनल ड्रामा है—जहां रिश्ते, स्मृतियां और समय के साथ बदलते जीवन की झलक मिलती है।
फिल्म में कोई दिखावटी ड्रामा नहीं, बल्कि सादगी और सच्चाई के जरिए कहानी कही गई है—जो धर्मेंद्र के व्यक्तित्व से गहराई से मेल खाती है।
धर्मेंद्र का अभिनय: एक विरासत का समापन
पहले रिव्यू की सबसे बड़ी तारीफ धर्मेंद्र के अभिनय को मिल रही है। कहा जा रहा है कि—
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यह उनका सबसे शांत और परिपक्व प्रदर्शन है
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संवाद कम, भावनाएं ज़्यादा बोलती हैं
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चेहरे के भाव और आंखों की गहराई ही कहानी कह देती है
दर्शकों और समीक्षकों का मानना है कि ‘इक्कीस’ में धर्मेंद्र ने अपने छह दशक लंबे करियर का निचोड़ रख दिया है—यही वजह है कि इसे उनकी अंतिम और सबसे निजी फिल्म कहा जा रहा है।
देओल परिवार के लिए क्यों खास है ‘इक्कीस’?
देओल परिवार के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भावनात्मक यात्रा है।
बॉबी और सनी देओल दोनों ने कई मौकों पर कहा है कि उन्होंने अपने पिता को पर्दे पर कई अवतारों में देखा है—लेकिन ‘इक्कीस’ में उन्हें एक इंसान, एक पिता और एक कलाकार के रूप में देखने का अनुभव अलग ही था।
यह फिल्म उनके लिए—
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गर्व का क्षण है
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विदाई का भावुक अध्याय है
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और सिनेमा के प्रति परिवार की साझा विरासत का प्रतीक है
सोशल मीडिया पर रिव्यू और प्रतिक्रियाएं
पहले रिव्यू के बाहर आते ही सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है।
फैंस इसे—
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“लीजेंड की आखिरी सलामी”
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“इमोशन से भरी मास्टरक्लास”
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“धर्मेंद्र के लिए परफेक्ट फेयरवेल”
जैसे शब्दों में बयान कर रहे हैं। कई लोग पहले से ही इसे अवार्ड-सीजन कंटेंडर मानने लगे हैं।
क्यों खास है ‘इक्कीस’?
‘इक्कीस’ इसलिए खास नहीं है क्योंकि यह बड़ी बजट या भारी-भरकम एक्शन वाली फिल्म है, बल्कि इसलिए क्योंकि—
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यह भावनाओं पर टिकी कहानी है
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एक सिनेमाई युग के समापन को दर्शाती है
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और दर्शकों को कलाकार से व्यक्तिगत स्तर पर जोड़ती है
आज के तेज़-तर्रार सिनेमा के दौर में ऐसी फिल्में दुर्लभ हैं।
निष्कर्ष
‘Ikkis First Review’ ने यह साफ कर दिया है कि यह फिल्म सिर्फ देखी नहीं जाएगी—महसूस की जाएगी।
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म के रूप में ‘इक्कीस’ भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक भावुक और गरिमामय अध्याय जोड़ने जा रही है। बॉबी और सनी देओल का भावुक होना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि फिल्म ने दिल को छुआ है।
