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21 Jan 2026, Wed

भारत ने रक्षा आधुनिकीकरण को दी गति: कार्बाइन और टॉरपीडो के लिए ₹4,666 करोड़ के अहम अनुबंध

भारत ने रक्षा आधुनिकीकरण को दी गति: कार्बाइन और टॉरपीडो के लिए ₹4,666 करोड़ के अहम अनुबंध

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भारत अपनी बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं और उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर लगातार जोर देता रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने कुल ₹4,666 करोड़ के महत्वपूर्ण रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।

ये समझौते एक ओर जहाँ थल सेना और नौसेना की पैदल सेना की नजदीकी युद्ध क्षमता को मजबूत करते हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी और जलमग्न युद्ध क्षमताओं को भी नई धार देते हैं।


खबरों में क्यों?

रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में—

  • भारतीय सेना और नौसेना के लिए क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन

  • भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों के लिए हैवी वेट टॉरपीडो

की खरीद हेतु ₹4,666 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।

इन समझौतों का उद्देश्य सैनिक स्तर पर युद्ध की तत्परता बढ़ाना, नौसेना की समुद्र के भीतर मारक क्षमता को मजबूत करना और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना है।


डील के बारे में

इन अनुबंधों पर नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

समझौतों के अंतर्गत—

  • थल सेना और नौसेना के लिए नई पीढ़ी की CQB कार्बाइन

  • पनडुब्बियों के लिए उन्नत हैवी वेट टॉरपीडो

की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह कदम भारत की रक्षा तैयारियों और मेक इन इंडिया पहल—दोनों को मजबूती प्रदान करता है।


रक्षा अनुबंधों की प्रमुख विशेषताएँ

1️⃣ CQB कार्बाइन की खरीद

रक्षा मंत्रालय ने 4.25 लाख से अधिक क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन की आपूर्ति के लिए ₹2,770 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • ये कार्बाइन भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सप्लाई की जाएँगी।

  • इनका इस्तेमाल भारतीय सेना और भारतीय नौसेना दोनों करेंगे।

  • ये हथियार कॉम्पैक्ट, हल्के और अत्यधिक सटीक हैं, जो शहरी युद्ध, आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमित दूरी की मुठभेड़ों के लिए उपयुक्त हैं।

नई कार्बाइन वर्तमान में उपयोग में लाए जा रहे पुराने छोटे हथियारों की जगह लेंगी, जिससे सैनिकों की क्लोज-कॉम्बैट क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


2️⃣ हैवी वेट टॉरपीडो डील

रक्षा मंत्रालय ने WASS Submarine Systems SRL के साथ ₹1,896 करोड़ का एक अलग अनुबंध भी किया है।

  • इस सौदे में 48 हैवी वेट टॉरपीडो की खरीद शामिल है।

  • ये टॉरपीडो कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियाँ के लिए हैं, जो प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित की गई हैं।

  • टॉरपीडो की डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होकर 2030 की शुरुआत तक पूरी होगी।

इन टॉरपीडो में उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली, आधुनिक सेंसर और उच्च मारक क्षमता मौजूद है, जिससे नौसेना की पनडुब्बी युद्ध शक्ति में बड़ा इजाफा होगा।


पृष्ठभूमि और रणनीतिक संदर्भ

भारत को लंबे समय से—

  • आधुनिक पैदल सेना हथियारों

  • और पर्याप्त पनडुब्बी गोला-बारूद

की कमी का सामना करना पड़ रहा था। अतीत में रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में देरी ने कई बार युद्ध तैयारी को प्रभावित किया।

हाल के वर्षों में सरकार ने—

  • आपातकालीन खरीद मार्ग

  • पूंजीगत खरीद प्रक्रियाओं के सरलीकरण

के ज़रिए अनुमोदन में तेजी लाई है।

कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियाँ भारत के पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े की रीढ़ मानी जाती हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए इनकी हथियार प्रणालियों का उन्नयन रणनीतिक रूप से अत्यंत आवश्यक है।


इस डील का महत्व

₹4,666 करोड़ के ये रक्षा अनुबंध कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हैं—

  • थल सेना की निकटवर्ती युद्ध क्षमता में सुधार

  • नौसेना की पानी के भीतर हमला करने की शक्ति में वृद्धि

  • स्वदेशी कंपनियों को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर भारत को समर्थन

इसके अलावा, घटक निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति के माध्यम से MSME सेक्टर को भी लाभ मिलेगा, जिससे—

  • रोजगार सृजन

  • औद्योगिक विकास

  • और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती

सुनिश्चित होगी।


मुख्य डेटा: एक नज़र में

पहलू विवरण
खबरों में क्यों? सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण हेतु बड़े रक्षा अनुबंध
कुल अनुबंध मूल्य ₹4,666 करोड़
फोकस क्षेत्र पैदल सेना हथियार, नौसैनिक जलमग्न युद्ध
प्रमुख खरीद CQB कार्बाइन, हैवी वेट टॉरपीडो
लाभार्थी भारतीय सेना, भारतीय नौसेना
रणनीतिक उद्देश्य युद्ध तैयारी और स्वदेशी रक्षा

निष्कर्ष

कार्बाइन और टॉरपीडो के लिए ₹4,666 करोड़ के ये अनुबंध भारत की रक्षा आधुनिकीकरण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। यह सौदा न केवल सैनिकों और नौसेना की परिचालन क्षमता को नई ताकत देगा, बल्कि भारत को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मजबूत आधार प्रदान करेगा।

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