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21 Jan 2026, Wed

बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया सक्रिय, 9–11 जनवरी तक भारी बारिश की चेतावनी, कई राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया सक्रिय, 9–11 जनवरी तक भारी बारिश की चेतावनी, कई राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

देश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया (Low Pressure Area) के कारण पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में 9, 10 और 11 जनवरी को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में शीतलहर (Cold Wave) का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, यह प्रणाली न केवल बारिश बढ़ाएगी बल्कि तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं को भी तेज़ कर सकती है।

मौसम में यह अचानक बदलाव कृषि, दैनिक जीवन और परिवहन पर सीधा असर डाल सकता है। खासकर उन राज्यों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है जहाँ पहले से ठंड और कोहरे का प्रभाव बना हुआ है।


खबरों में क्यों?

  • बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया का गठन

  • 9, 10 और 11 जनवरी को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना

  • उत्तर भारत और कुछ मध्य क्षेत्रों में शीतलहर का अलर्ट

  • तापमान में 2–4 डिग्री तक गिरावट की आशंका

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम को देखते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं।


लो प्रेशर एरिया क्या होता है?

लो प्रेशर एरिया वह क्षेत्र होता है जहाँ वायुमंडलीय दबाव आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम होता है। ऐसे क्षेत्र में—

  • हवा आसपास से केंद्र की ओर बढ़ती है

  • नमी का जमाव होता है

  • बादल बनने और बारिश की संभावना बढ़ जाती है

बंगाल की खाड़ी में बनने वाले लो प्रेशर सिस्टम अक्सर—

  • पूर्वी भारत

  • दक्षिणी प्रायद्वीप

  • और कभी-कभी मध्य भारत

के मौसम को प्रभावित करते हैं।


किन राज्यों में भारी बारिश की संभावना?

मौसम विभाग के अनुसार, 9 से 11 जनवरी के बीच निम्न राज्यों में बारिश का असर देखा जा सकता है:

🌧️ भारी बारिश संभावित क्षेत्र

  • ओडिशा

  • आंध्र प्रदेश (तटीय और दक्षिणी भाग)

  • तमिलनाडु

  • पुडुचेरी

  • दक्षिण आंतरिक कर्नाटक

  • केरल के कुछ हिस्से

इन क्षेत्रों में—

  • गरज के साथ बारिश

  • तेज़ हवाएँ (30–40 किमी/घंटा)

  • कुछ स्थानों पर जलभराव

की स्थिति बन सकती है।


शीतलहर का अलर्ट: कहां पड़ेगा असर?

जहाँ एक ओर बारिश की गतिविधियाँ तेज़ होंगी, वहीं दूसरी ओर देश के उत्तर और मध्य भागों में ठंड और बढ़ने की संभावना है।

❄️ शीतलहर से प्रभावित संभावित क्षेत्र

  • उत्तर प्रदेश

  • बिहार

  • झारखंड

  • मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से

  • राजस्थान के कुछ क्षेत्र

  • दिल्ली–NCR

इन इलाकों में—

  • न्यूनतम तापमान में 2–4 डिग्री की गिरावट

  • सुबह और रात के समय कड़ाके की ठंड

  • ठंडी और तेज़ हवाएँ

देखी जा सकती हैं।


तापमान और कोहरे की स्थिति

IMD के अनुसार—

  • शीतलहर वाले क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है

  • उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में घना कोहरा भी बना रह सकता है

  • दृश्यता कम होने से सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है

विशेषकर सुबह के समय वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


कृषि और जनजीवन पर प्रभाव

🌾 कृषि पर असर

  • बारिश से रबी फसलों को कुछ क्षेत्रों में लाभ

  • लेकिन अधिक वर्षा से

    • सरसों

    • चना

    • और सब्ज़ी फसलों

को नुकसान की आशंका

🚦 जनजीवन पर असर

  • शहरी इलाकों में जलभराव

  • ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों पर समस्या

  • ठंड से बुज़ुर्गों और बच्चों को स्वास्थ्य जोखिम


मौसम विभाग की सलाह

IMD ने लोगों और प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है—

  • अनावश्यक यात्रा से बचें

  • बारिश और ठंड के दौरान खुले में लंबे समय तक न रहें

  • किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह

  • मछुआरों को बंगाल की खाड़ी में न जाने की चेतावनी


जनवरी में ऐसा मौसम क्यों?

जनवरी के महीने में—

  • पश्चिमी विक्षोभ

  • बंगाल की खाड़ी के सिस्टम

  • और उत्तरी हवाओं

का संयुक्त प्रभाव देखने को मिलता है।

इस बार—

  • बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर

  • उत्तर से आ रही ठंडी हवाएँ

एक साथ सक्रिय हैं, जिससे बारिश और शीतलहर दोनों की स्थिति बन रही है।


आगे क्या रहेगा रुझान?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार—

  • 11 जनवरी के बाद लो प्रेशर सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है

  • बारिश की तीव्रता में कमी आएगी

  • लेकिन ठंड का असर कुछ और दिनों तक बना रह सकता है

अगले कुछ दिनों तक मौसम विभाग के अपडेट पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।


निष्कर्ष

बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया ने एक बार फिर देश के मौसम को प्रभावित किया है। 9, 10 और 11 जनवरी को जहां पूर्वी और दक्षिणी भारत में भारी बारिश की संभावना है, वहीं उत्तर और मध्य भारत में शीतलहर लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।

यह मौसम परिवर्तन खेती, स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों—तीनों पर असर डाल सकता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और आवश्यक सावधानियाँ बरतना बेहद ज़रूरी है। आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज़ से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन सही तैयारी और सतर्कता से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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