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21 Jan 2026, Wed

बंगाल चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने की 35 सदस्यीय समिति की घोषणा, संगठन को मजबूत करने की तैयारी

बंगाल चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने की 35 सदस्यीय समिति की घोषणा, संगठन को मजबूत करने की तैयारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पार्टी की 35 सदस्यीय नई प्रदेश समिति की घोषणा कर दी है। इस समिति में पुराने और नए नेताओं को संतुलित तरीके से शामिल कर पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही आंतरिक गुटबाजी को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।

यह समिति ऐसे समय घोषित की गई है, जब विधानसभा चुनाव में केवल तीन महीने का समय शेष माना जा रहा है और संगठनात्मक मजबूती भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।


लंबे इंतज़ार के बाद बनी राज्य समिति

पश्चिम बंगाल भाजपा की राज्य समिति का गठन लंबे समय से लंबित था। पार्टी नेतृत्व की योजना थी कि दुर्गा पूजा से पहले पूरी टीम को मैदान में उतार दिया जाए, लेकिन 2019 के बाद पार्टी में शामिल हुए नेताओं और पुराने संगठनात्मक चेहरों के बीच लगातार टकराव के कारण यह प्रक्रिया बार-बार टलती रही।

आखिरकार, केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप और चुनावी दबाव के बीच शमिक भट्टाचार्य ने संतुलन आधारित फार्मूले के तहत समिति की घोषणा की।


जुलाई 2025 में अध्यक्ष बने थे शमिक भट्टाचार्य

शमिक भट्टाचार्य ने जुलाई 2025 में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। अध्यक्ष बनने के लगभग छह महीने बाद उन्होंने यह 35 सदस्यीय समिति घोषित की है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की अंदरूनी खींचतान को खत्म कर चुनावी मोड में संगठन को लाना रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समिति शमिक भट्टाचार्य के नेतृत्व की पहली बड़ी संगठनात्मक परीक्षा मानी जा रही है।


बड़े टकराव को सुधारने की कोशिश

घोषित सूची से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी ने बिना किसी बड़े विवाद को जन्म दिए, धीरे-धीरे संगठन की दिशा सुधारने की कोशिश की है। समिति में वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं का वर्चस्व है, लेकिन कुछ नामों को बाहर रखकर और कुछ की वापसी कराकर नेतृत्व ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि:

  • पार्टी चुनाव से पहले गुटीय राजनीति को शांत करना चाहती है

  • संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है

  • चुनावी रणनीति और संगठनात्मक भूमिका को अलग-अलग रखा जाएगा

यह फैसला बंगाल भाजपा में “मैनेज्ड ट्रांज़िशन” के रूप में देखा जा रहा है।


BJP State Committee: दिलीप घोष प्रदेश समिति से बाहर

इस नई समिति का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह है कि बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को प्रदेश समिति से बाहर रखा गया है। दिलीप घोष लंबे समय तक बंगाल भाजपा का सबसे मजबूत संगठनात्मक चेहरा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में केंद्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का आग्रह किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक यात्रा के दौरान दिलीप घोष से सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही थी। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें कोई औपचारिक संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हालांकि, नई समिति से उनका बाहर रहना यह संकेत देता है कि पार्टी उन्हें चुनावी मैदान या प्रचार भूमिका के लिए बचाकर रखना चाहती है।


सौमित्र खान और लॉकेट चटर्जी की कमेटी में वापसी

इस संगठनात्मक फेरबदल का सबसे बड़ा फायदा विष्णुपुर के सांसद सौमित्र खान को मिला है, जिन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है। इसके साथ ही:

  • लॉकेट चटर्जी

  • ज्योतिर्मय सिंह महतो (लोकसभा सांसद)

जैसे नेताओं की भी प्रदेश समिति में वापसी हुई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे वरिष्ठ नेता जो विधानसभा चुनाव में संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं, उन्हें जान-बूझकर समिति से बाहर रखा गया है ताकि वे चुनाव प्रचार और क्षेत्रीय प्रबंधन पर पूरी तरह फोकस कर सकें।


चुनावी रणनीति के लिहाज़ से समिति का महत्व

2026 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए “करो या मरो” की स्थिति जैसा माना जा रहा है। ऐसे में यह 35 सदस्यीय समिति:

  • संगठन और चुनावी रणनीति के बीच सेतु बनेगी

  • जिलों और मंडलों में समन्वय बढ़ाएगी

  • आंतरिक असंतोष को नियंत्रित रखने में मदद करेगी

  • केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाएगी

यह समिति भाजपा के लिए संगठनात्मक स्थिरता और चुनावी अनुशासन सुनिश्चित करने का माध्यम बन सकती है।


राजनीतिक संदेश क्या है?

नई प्रदेश समिति से भाजपा ने तीन बड़े संदेश दिए हैं:

  1. गुटबाजी पर नियंत्रण – चुनाव से पहले अंदरूनी संघर्ष को सीमित करने की कोशिश

  2. अनुभव बनाम चुनावी उपयोगिता – कुछ नेताओं को संगठन से बाहर रखकर मैदान में उतारने की रणनीति

  3. संतुलन की राजनीति – पुराने और नए चेहरों के बीच संतुलन


निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले 35 सदस्यीय प्रदेश समिति की घोषणा कर शमिक भट्टाचार्य ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा अब संगठन को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। दिलीप घोष को बाहर रखना, सौमित्र खान और लॉकेट चटर्जी की वापसी, और संभावित उम्मीदवारों को संगठन से अलग रखना—ये सभी फैसले एक सुनियोजित चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

आने वाले महीनों में यही समिति तय करेगी कि भाजपा बंगाल की राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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