झारखंड की राजधानी रांची से सटे ओरमांझी के रहने वाले कन्हैया के लापता होने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर की जांच का रूप ले चुका है। कन्हैया को गायब हुए 59 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो देश के 7 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर रही है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के लापता होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह कानून-व्यवस्था, मानव तस्करी, संगठित अपराध और पुलिस जांच की क्षमता जैसे कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे और कब लापता हुआ कन्हैया?
जानकारी के अनुसार, ओरमांझी निवासी कन्हैया करीब दो महीने पहले अचानक लापता हो गया था। परिजनों का कहना है कि वह रोज़मर्रा के काम से घर से निकला था, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटा। शुरुआत में इसे सामान्य गुमशुदगी मानकर स्थानीय स्तर पर खोजबीन की गई, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए और कोई सुराग नहीं मिला, मामला और रहस्यमय होता चला गया।
परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई। लेकिन 59 दिनों तक कोई ठोस जानकारी सामने न आने से अब पुलिस भी इसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील केस मान रही है।
क्यों बनाई गई SIT?
लगातार समय बीतने और स्थानीय जांच से कोई ठोस नतीजा न निकलने के बाद रांची पुलिस ने SIT (Special Investigation Team) का गठन किया। SIT का उद्देश्य:
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मामले की जांच को तेज़ और केंद्रित बनाना
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अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संभावना की जांच
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तकनीकी, खुफिया और जमीनी सूचनाओं को एक साथ जोड़ना
SIT में अनुभवी पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और खुफिया इनपुट से जुड़े अधिकारी शामिल किए गए हैं।
7 राज्यों में एक साथ छापेमारी
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि कन्हैया का मामला राज्य की सीमाओं से बाहर जुड़ा हो सकता है। इसी आधार पर रांची पुलिस की SIT ने:
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झारखंड
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बिहार
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पश्चिम बंगाल
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उत्तर प्रदेश
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छत्तीसगढ़
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ओडिशा
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महाराष्ट्र
जैसे राज्यों में एक साथ छापेमारी और जांच अभियान शुरू किया है। इन राज्यों में संभावित ठिकानों, संदिग्ध व्यक्तियों और नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।
किन एंगल्स से हो रही है जांच?
पुलिस इस मामले में किसी भी संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं कर रही है। जांच के प्रमुख एंगल्स में शामिल हैं:
1️⃣ आपराधिक साजिश
यह जांच की जा रही है कि कहीं कन्हैया किसी आपराधिक गिरोह या रंजिश का शिकार तो नहीं हुआ।
2️⃣ मानव तस्करी
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कन्हैया को मानव तस्करी गिरोह ने तो नहीं फंसाया।
3️⃣ आर्थिक या व्यक्तिगत विवाद
किसी लेन-देन, नौकरी, या निजी विवाद के चलते गायब होने की संभावना भी टटोली जा रही है।
4️⃣ तकनीकी साक्ष्य
मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, सोशल मीडिया गतिविधि और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है।
परिवार की बढ़ती चिंता और अपील
59 दिनों से अपने बेटे का इंतज़ार कर रहे कन्हैया के परिजनों की हालत बेहद खराब है। परिवार ने कई बार प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि:
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हर बीतता दिन उम्मीद और डर दोनों बढ़ा रहा है
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अगर समय रहते ठोस कार्रवाई होती, तो शायद कन्हैया का पता चल जाता
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वे चाहते हैं कि जांच को और तेज़ किया जाए
परिजनों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी को कन्हैया से जुड़ी कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
पुलिस का दावा: जल्द मिलेगा सुराग
रांची पुलिस का कहना है कि SIT की कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार:
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कई अहम सुराग मिले हैं
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कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है
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अंतर-राज्यीय नेटवर्क की पुष्टि के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं
पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही कन्हैया के लापता होने के रहस्य से पर्दा उठेगा।
राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल
यह मामला झारखंड में लापता लोगों की बढ़ती घटनाओं और उनकी जांच पर भी सवाल खड़े करता है। अगर 59 दिनों तक किसी युवक का पता नहीं चलता, तो यह साफ करता है कि:
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शुरुआती जांच में देरी हुई
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अंतर-राज्यीय मामलों से निपटने के लिए मजबूत समन्वय की ज़रूरत है
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तकनीक और खुफिया तंत्र का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है
