झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक भीषण सड़क हादसे ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीना, बल्कि एक मां की पूरी दुनिया उजाड़ दी। जिसने पहले अपने पति को खोया, अब उसी मां की गोद सूनी हो गई—उसका जवान बेटा भी एक सड़क हादसे में काल का ग्रास बन गया।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस टूटते हुए विश्वास की कहानी है, जहाँ एक मां हर बार हालात से लड़ती रही, लेकिन किस्मत ने उसे बार-बार पराजित कर दिया।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना किरीबुरू–बड़ाजामदा मुख्य मार्ग पर हुई। युवक अपने किसी निजी काम से बाइक से जा रहा था, तभी तेज रफ्तार वाहन ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक सड़क पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचते-पहुंचते डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर जैसे ही घर पहुंची, पूरे मोहल्ले में मातम पसर गया।
पहले पति की मौत, फिर बेटे का सहारा भी छिना
इस हादसे ने इसलिए भी लोगों को भीतर तक झकझोर दिया, क्योंकि मृत युवक की मां पहले ही जीवन का सबसे बड़ा आघात झेल चुकी थी। कुछ वर्ष पहले एक दुर्घटना/बीमारी के कारण उसके पति की मौत हो गई थी। पति के जाने के बाद उसी बेटे ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी।
बेटा ही मां की ताकत था, उम्मीद था, सहारा था। वही घर चलाता था, वही मां के सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अब वही बेटा हमेशा के लिए चला गया।
मां की हालत देख हर आंख नम
बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बेसुध होकर गिर पड़ी। कभी बेटे की तस्वीर से लिपटकर रोती, तो कभी बार-बार यही कहती—
“अब मैं किसके लिए जियूं?”
उसका यह सवाल हर उस व्यक्ति के दिल को चीर गया, जो वहां मौजूद था। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के लिए उसे संभालना बेहद मुश्किल हो गया। एक मां, जिसने अपने जीवन की सारी खुशियाँ खो दी हों, उसे सांत्वना देना शब्दों से परे था।
गांव में पसरा मातम
इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। जिस घर में कभी बेटे की हँसी गूंजती थी, आज वहां सिर्फ सिसकियों की आवाज़ है। गांव के लोग इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि अब उस बुजुर्ग मां का भविष्य क्या होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक बेहद मेहनती और जिम्मेदार था। वह अपनी मां का पूरा ध्यान रखता था और भविष्य में उसे बेहतर जीवन देने के सपने देखता था।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर झारखंड में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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तेज रफ्तार
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ट्रैफिक नियमों की अनदेखी
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हेलमेट और सुरक्षा उपायों की कमी
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संकरी और खराब सड़कों की स्थिति
इन सभी कारणों से आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं। हर हादसे के बाद प्रशासन जांच की बात करता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुधार अब भी अधूरा है।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। अब इस मां के पास न कोई कमाने वाला है, न कोई सहारा। ऐसे में सरकार और समाज की जिम्मेदारी बनती है कि उसे अकेला न छोड़ा जाए।
लोगों का कहना है कि मुआवजा केवल पैसे की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन इससे मां का जीवन थोड़ा आसान हो सकता है।
एक मां का दर्द, पूरे समाज की जिम्मेदारी
यह घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं होते, बल्कि इनके पीछे टूटे हुए सपने, बिखरे हुए परिवार और जीवनभर का दर्द छिपा होता है।
एक मां जिसने पहले पति खोया और अब बेटे को—उसका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
किरीबुरू की यह सड़क दुर्घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—लापरवाही की कीमत किसी का पूरा संसार हो सकती है।
आज जरूरत है कि हम सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लें, नियमों का पालन करें और प्रशासन भी सख्त कदम उठाए।
क्योंकि हर दुर्घटना के बाद रोने वाली कोई न कोई मां होती है… और हर बार सवाल वही रहता है—
“आखिर कब तक?”
