चीन की राजनीति और सैन्य ढांचे में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हाल के महीनों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कई शीर्ष अधिकारियों को अचानक उनके पदों से हटाया गया है। इसी कड़ी में एक बेहद सनसनीखेज दावा सामने आया है कि चीनी सेना का एक शीर्ष जनरल कथित तौर पर देश की न्यूक्लियर और मिसाइल योजनाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ बाहर पहुंचा रहा था।
इन घटनाओं के बाद सवाल उठ रहे हैं—
क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार विरोधी अभियान है या इसके पीछे तख्तापलट की कोई साजिश थी?
और क्या इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की कोई भूमिका रही है?
किस जनरल को हटाया गया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की रॉकेट फोर्स (PLA Rocket Force) से जुड़े एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी को पद से हटाया गया है। रॉकेट फोर्स वही इकाई है, जो चीन की न्यूक्लियर मिसाइलों और रणनीतिक हथियारों की जिम्मेदारी संभालती है।
हालांकि चीन की सरकार ने आधिकारिक तौर पर आरोपों का विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सुरक्षा विश्लेषकों का दावा है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं हो सकता।
न्यूक्लियर प्लान बेचने के आरोप कितने गंभीर?
कुछ पश्चिमी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी पर चीन की मिसाइल तैनाती, न्यूक्लियर कमांड स्ट्रक्चर और रणनीतिक क्षमताओं से जुड़ी जानकारी लीक करने का संदेह है।
अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जाएगा। PLA Rocket Force को चीन की सैन्य शक्ति की रीढ़ माना जाता है और इसमें सेंध लगना सीधे शी जिनपिंग की सत्ता और नियंत्रण पर सवाल खड़े करता है।
शी जिनपिंग की सख्ती के पीछे क्या कारण?
शी जिनपिंग 2012 से सत्ता में आने के बाद से ही सेना पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं। उनका “भ्रष्टाचार विरोधी अभियान” कई बार राजनीतिक शुद्धिकरण (political purge) जैसा नजर आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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शी जिनपिंग सेना में किसी भी तरह की वफादारी की कमी बर्दाश्त नहीं करना चाहते
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PLA में स्वतंत्र शक्ति केंद्र उनके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं
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रॉकेट फोर्स जैसी इकाइयों पर नियंत्रण बनाए रखना उनके शासन के लिए बेहद जरूरी है
इसी वजह से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
क्या यह तख्तापलट की साजिश थी?
यहीं से सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल खड़ा होता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों को हटाया जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं लगती।
कयास लगाए जा रहे हैं कि:
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सेना के भीतर असंतोष के कुछ गुट सक्रिय हो सकते थे
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शी जिनपिंग की अत्यधिक केंद्रीकृत सत्ता से कुछ वरिष्ठ अधिकारी नाराज़ थे
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ताइवान, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच आंतरिक अस्थिरता खतरनाक हो सकती थी
हालांकि, तख्तापलट की साजिश का कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन चीन जैसी बंद राजनीतिक व्यवस्था में ऐसी आशंकाएँ पूरी तरह नकारी भी नहीं जा सकतीं।
ट्रंप या अमेरिका का क्या रोल हो सकता है?
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका–चीन संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे। ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी बैन और ताइवान मुद्दे पर टकराव खुलकर सामने आया।
कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि:
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अमेरिका चीन की आंतरिक कमजोरियों पर लगातार नजर रखे हुए था
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PLA से जुड़ी खुफिया जानकारियाँ हासिल करने की कोशिशें तेज हुईं
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ट्रंप प्रशासन की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति का असर चीनी सत्ता संरचना तक पहुंचा
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और ट्रंप या अमेरिकी एजेंसियों की सीधी भूमिका साबित करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं है।
चीन की चुप्पी क्या बताती है?
चीन ने इस पूरे मामले पर बेहद सीमित प्रतिक्रिया दी है। न तो विस्तृत आरोप सार्वजनिक किए गए हैं और न ही किसी विदेशी हस्तक्षेप की पुष्टि की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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चीन अपनी सैन्य कमजोरियों को उजागर नहीं करना चाहता
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आंतरिक अस्थिरता की खबरें अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं
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शी जिनपिंग इसे आंतरिक “अनुशासनात्मक कार्रवाई” के रूप में पेश करना चाहते हैं
वैश्विक राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब:
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ताइवान को लेकर तनाव चरम पर है
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अमेरिका और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बन चुका है
ऐसे में चीन की सेना में किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
निष्कर्ष
चीनी सेना के शीर्ष जनरल को हटाए जाने और न्यूक्लियर प्लान लीक होने के कथित आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला है, या फिर सत्ता और वफादारी की एक गहरी लड़ाई?
क्या वाकई कोई तख्तापलट की साजिश थी, या यह शी जिनपिंग की सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति?
फिलहाल सच्चाई पर पर्दा बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि चीन की सेना में हो रही यह उथल-पुथल आने वाले समय में एशिया और दुनिया की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकती है।
