बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। राज्य की पांच सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक विधायक ने मतदान नहीं किया। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा को लेकर हो रही है, जिन्होंने खुद सामने आकर वोट न देने की वजह स्पष्ट की।
उनके बयान ने महागठबंधन (Grand Alliance) के अंदरूनी समीकरणों और उम्मीदवार चयन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
📌 क्या है पूरा मामला?
सोमवार को बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें महागठबंधन को अपने उम्मीदवारों की जीत की उम्मीद थी। लेकिन मतदान के दौरान चार विधायकों की अनुपस्थिति ने समीकरण बदल दिए।
कांग्रेस के तीन विधायक—सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह—ने वोट नहीं किया, जबकि राजद के फैसल रहमान भी मतदान में शामिल नहीं हुए। इन चार विधायकों की गैरहाजिरी का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा और अंततः पांचों सीटों पर एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों की जीत हो गई।
🗣️ सुरेंद्र प्रसाद ने फेसबुक पर क्या कहा?
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने इस पूरे मामले पर फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे महागठबंधन के उम्मीदवार से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने मतदान से दूरी बनाई।
उन्होंने लिखा:
“एक सीट का मौका था महागठबंधन के पास, तो दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था। वह भी नहीं तो मुकेश सहनी जी को ही मौका दिया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है।”
उन्होंने आगे कहा कि वे एनडीए का समर्थन नहीं कर सकते थे, लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार से असंतुष्ट होने के कारण उन्होंने किसी के पक्ष में वोट नहीं देना ही बेहतर समझा।
⚖️ उम्मीदवार चयन पर उठे सवाल
सुरेंद्र प्रसाद के इस बयान ने महागठबंधन के भीतर उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि सही और मजबूत जनाधार वाले नेताओं को नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनका निर्णय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक असहमति के कारण था। इससे यह संकेत मिलता है कि गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और असंतोष मौजूद है।
👤 कौन हैं सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा?
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। वे पहली बार विधायक बने हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा दिलचस्प रही है।
इससे पहले वे एनडीए गठबंधन के साथ भी जुड़े रहे हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जदयू के उम्मीदवार धीरेन्द्र प्रताप सिंह (रिंकू सिंह) को 1675 वोटों से हराकर जीत हासिल की और पहली बार विधायक बने।
📊 चार विधायकों की गैरहाजिरी का असर
राज्यसभा चुनाव में चार विधायकों का मतदान न करना महागठबंधन के लिए भारी पड़ा। खासकर तब, जब मुकाबला कड़ा हो और हर वोट की अहमियत हो।
इन विधायकों की अनुपस्थिति के कारण राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की स्थिति कमजोर हो गई और अंततः एनडीए के सभी उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।
यह घटना दर्शाती है कि राजनीतिक दलों के भीतर एकजुटता और समन्वय कितना जरूरी होता है।
🔍 क्या संकेत देती है यह घटना?
यह मामला केवल एक विधायक के वोट न देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत भी दे सकता है। गठबंधन के भीतर असहमति, उम्मीदवार चयन को लेकर नाराजगी और रणनीतिक कमजोरी जैसे मुद्दे सामने आए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसे मतभेद समय रहते दूर नहीं किए गए, तो इसका असर भविष्य के चुनावों पर भी पड़ सकता है।
✍️ निष्कर्ष
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा का वोट न देना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बन गया है। उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
यह घटना न केवल चुनाव परिणाम को प्रभावित करती है, बल्कि गठबंधन की आंतरिक राजनीति और रणनीति पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस स्थिति से कैसे निपटता है।
