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30 Apr 2026, Thu

सरायकेला में बिजली संकट पर प्रशासन सख्त, शिकायत के लिए मोबाइल नंबर जारी

सरायकेला में बिजली संकट पर प्रशासन सख्त, शिकायत के लिए मोबाइल नंबर जारी

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती लू के बीच सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए अहम पहल की है। बढ़ती तापमान की स्थिति में जहां बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, वहीं फॉल्ट, ट्रिपिंग और लो वोल्टेज जैसी समस्याओं ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बिजली विभाग के अधिकारियों—सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE)—के मोबाइल नंबर जारी किए हैं, ताकि उपभोक्ता सीधे संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और समस्या का त्वरित समाधान हो सके।


भीषण गर्मी में बढ़ी बिजली संकट की चुनौती

इन दिनों क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे बिजली की खपत भी अपने चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में कई इलाकों में बिजली लाइन में खराबी, बार-बार ट्रिपिंग और विशेष रूप से लो वोल्टेज की समस्या देखने को मिल रही है।

खासकर खरसावां और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ रहा है—पंप सेट सही से काम नहीं कर रहे, फ्रिज ठंडक नहीं दे पा रहे, और कूलर व पंखे भी पर्याप्त राहत नहीं दे रहे।

गर्मी के इस मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य बिजली उपकरणों की उपयोगिता बढ़ जाती है, लेकिन कम वोल्टेज के कारण ये उपकरण भी ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।


प्रशासन की पहल: सीधे अधिकारियों से संपर्क की सुविधा

स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरायकेला-खरसावां प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिले के सभी प्रखंडों में तैनात बिजली विभाग के अभियंताओं के मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिए गए हैं।

अब अगर किसी इलाके में बिजली सप्लाई बाधित होती है या तकनीकी समस्या आती है, तो उपभोक्ता सीधे संबंधित अधिकारी को कॉल कर सकते हैं। इससे शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल होगी और समाधान में लगने वाला समय भी कम होगा।

यह पहल खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए कई स्तरों से गुजरना पड़ता था, जिससे देरी होती थी।


लो वोल्टेज और फॉल्ट से जूझते उपभोक्ता

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से बिजली आपूर्ति की स्थिति काफी अस्थिर बनी हुई है। लो वोल्टेज की समस्या के कारण घरेलू उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि मोटर पंप सही ढंग से नहीं चल पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जहां पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की कमी रहती है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली व्यवस्था में स्थायी सुधार किया जाए, ताकि गर्मी के इस कठिन समय में राहत मिल सके।


जारी किए गए महत्वपूर्ण मोबाइल नंबर

बिजली से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रशासन द्वारा जारी किए गए कुछ प्रमुख संपर्क नंबर इस प्रकार हैं:

  • सहायक विद्युत अभियंता, सरायकेला: 9431135938
  • सहायक विद्युत अभियंता, राजखरसावां: 9431135939
  • सहायक विद्युत अभियंता, चांडिल: 9431135940
  • कनिष्ठ विद्युत अभियंता (सरायकेला शहरी/ग्रामीण/कांड्रा): 9431135923
  • कनिष्ठ विद्युत अभियंता (खरसावां/कुचाई/राजनगर): 9304107332
  • कनिष्ठ विद्युत अभियंता (चांडिल/ईचागढ़/नीमडीह): 9471727589
  • सहायक विद्युत अभियंता, आदित्यपुर-1: 9431135929
  • सहायक विद्युत अभियंता, आदित्यपुर-2 (गम्हरिया): 9431135930
  • कनिष्ठ विद्युत अभियंता (आदित्यपुर 1 व 2): 9431135950
  • कनिष्ठ विद्युत अभियंता (आदित्यपुर 3, 4, गम्हरिया): 9431135955

इन नंबरों के जरिए उपभोक्ता सीधे अपने क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंच सकते हैं।


क्या यह पहल असरदार साबित होगी?

प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।

यदि अधिकारी समय पर प्रतिक्रिया देते हैं और समस्याओं का त्वरित समाधान करते हैं, तो इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और बिजली व्यवस्था में सुधार भी देखने को मिलेगा।

साथ ही, लंबे समय तक समाधान के लिए बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी जरूरी है, ताकि बार-बार आने वाली समस्याओं से स्थायी रूप से छुटकारा मिल सके।


निष्कर्ष

सरायकेला-खरसावां में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली संकट से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम आम लोगों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।

सीधे अधिकारियों से संपर्क की सुविधा मिलने से न केवल शिकायत दर्ज करना आसान होगा, बल्कि समस्याओं का समाधान भी तेजी से संभव हो सकेगा।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे लोगों को वास्तव में राहत मिलती है।

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