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31 Jan 2026, Sat

Jharkhand Civic Elections: झारखंड निकाय चुनाव का हो गया शंखनाद, 23 फरवरी को वोटिंग और 27 फरवरी को होगी काउंटिंग

Jharkhand Civic Elections: झारखंड निकाय चुनाव का हो गया शंखनाद, 23 फरवरी को वोटिंग और 27 फरवरी को होगी काउंटिंग

झारखंड की राजनीति में लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार नगर निकाय चुनाव का शंखनाद हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक तौर पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके अनुसार 23 फरवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 27 फरवरी 2026 को मतगणना कराई जाएगी। इस ऐलान के साथ ही राज्यभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और शहरी राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज़ हो गई है।

नगर निकाय चुनाव झारखंड के शहरी शासन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से कई नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतें प्रशासकों के भरोसे संचालित हो रही थीं।


लंबे समय बाद हो रहे हैं निकाय चुनाव

झारखंड में नगर निकाय चुनाव काफी समय से लंबित थे। आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद, परिसीमन और संवैधानिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण चुनाव टलते रहे। इसका सीधा असर शहरी प्रशासन पर पड़ा, जहां निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासकीय व्यवस्था हावी रही।

अब चुनाव की घोषणा को:

  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली

  • स्थानीय स्वशासन को मजबूती

  • शहरी विकास योजनाओं में गति

के रूप में देखा जा रहा है।


चुनाव कार्यक्रम की मुख्य बातें

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:

  • मतदान की तिथि: 23 फरवरी 2026

  • मतगणना की तिथि: 27 फरवरी 2026

  • आचार संहिता लागू: घोषणा के साथ ही

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।


किन-किन निकायों में होगा चुनाव?

झारखंड के नगर निकाय चुनाव के तहत राज्य के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेगी। इनमें शामिल हैं:

  • नगर निगम

  • नगर परिषद

  • नगर पंचायत

इन निकायों में:

  • मेयर / नगर अध्यक्ष

  • डिप्टी मेयर / उपाध्यक्ष

  • वार्ड पार्षद

के पदों के लिए मतदान कराया जाएगा।

नगर निकाय शहरी जीवन से जुड़े अहम मुद्दों—जैसे साफ-सफाई, सड़क, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और स्थानीय विकास—का सीधा संचालन करते हैं।


राजनीतिक दलों की बढ़ी हलचल

चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी दल दोनों ही:

  • उम्मीदवारों के चयन

  • जातीय और सामाजिक समीकरण

  • वार्ड स्तर की रणनीति

पर मंथन में जुट गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल शहरी निकाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीति पर भी पड़ेगा।


शहरी मतदाताओं के अहम मुद्दे

निकाय चुनाव में झारखंड के शहरी मतदाताओं के सामने कई ज्वलंत मुद्दे हैं:

  • पेयजल संकट

  • खराब सड़कें और ट्रैफिक जाम

  • कचरा प्रबंधन और स्वच्छता

  • जलजमाव की समस्या

  • स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा

  • बेरोज़गारी और शहरी गरीबों की स्थिति

मतदाता चाहते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि केवल वादे नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर समाधान करें।


महिला और आरक्षित वर्गों की भागीदारी

नगर निकाय चुनावों में महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान है। इससे:

  • शहरी राजनीति में समावेशिता बढ़ेगी

  • नए और युवा नेतृत्व को मौका मिलेगा

  • जमीनी स्तर पर सामाजिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र की वह सीढ़ी हैं, जहाँ से कई बड़े नेता आगे की राजनीति में कदम रखते हैं।


प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी

राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने चुनाव को लेकर तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। इनमें शामिल हैं:

  • मतदान केंद्रों की पहचान और व्यवस्थापन

  • सुरक्षा बलों की तैनाती

  • संवेदनशील और अति-संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी

  • ईवीएम और चुनाव सामग्री की व्यवस्था

प्रशासन का दावा है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं।


लोकतंत्र के लिए क्यों अहम हैं निकाय चुनाव?

नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र की जड़ माने जाते हैं, क्योंकि:

  • यह शासन को जनता के सबसे नज़दीक लाते हैं

  • स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर होता है

  • जवाबदेही तय होती है

  • आम नागरिकों को सीधे निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिलती है

मजबूत नगर निकाय ही मजबूत शहर और सशक्त राज्य की नींव रखते हैं।


निष्कर्ष

झारखंड में निकाय चुनाव का शंखनाद शहरी लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 23 फरवरी को होने वाला मतदान और 27 फरवरी को मतगणना राज्य की शहरी राजनीति की दिशा तय करेगी। अब यह जनता पर निर्भर है कि वह अपने शहर के भविष्य के लिए किसे चुनती है।

चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह शहरी विकास, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता का उत्सव है। आने वाले दिनों में झारखंड का शहरी परिदृश्य इसी चुनाव के नतीजों से नई दिशा पाएगा।

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