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5 Feb 2026, Thu

Jharkhand Naxal Encounter: झारखंड के सारंडा में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, एक महिला समेत 4.49 करोड़ के इनामी 13 नक्सली ढेर

Jharkhand Naxal Encounter: झारखंड के सारंडा में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, एक महिला समेत 4.49 करोड़ के इनामी 13 नक्सली ढेर

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता मिली है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने जंगलों वाले सारंडा क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने एक बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 13 नक्सलियों को ढेर कर दिया, जिन पर कुल मिलाकर 4.49 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। मारे गए नक्सलियों में एक महिला नक्सली भी शामिल है, जो संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थी।

यह मुठभेड़ झारखंड में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कार्रवाई मानी जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है सारंडा ऑपरेशन?

सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और सीमित संचार सुविधाएँ नक्सलियों को यहां लंबे समय तक सुरक्षित पनाह देती रही हैं। इसी इलाके से नक्सली—

  • सुरक्षाबलों पर हमलों की साजिश

  • हथियारों और विस्फोटकों की आवाजाही

  • जबरन वसूली और धमकी

जैसी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में 13 हार्डकोर नक्सलियों का मारा जाना नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ यह बड़ा ऑपरेशन?

खुफिया एजेंसियों को पिछले कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि सारंडा के जंगलों में सीपीआई (माओवादी) संगठन के शीर्ष और सक्रिय कमांडर छिपे हुए हैं। इसके बाद—

  • झारखंड पुलिस

  • कोबरा (CoBRA) बटालियन

  • सीआरपीएफ और जिला पुलिस

की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च और डेस्ट्रॉय ऑपरेशन शुरू किया।

जैसे ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की मौजूदगी वाले इलाके को घेरा, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद दोनों तरफ से कई घंटों तक चली भीषण मुठभेड़ में 13 नक्सली मारे गए।

मारे गए नक्सलियों पर 4.49 करोड़ का इनाम

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मारे गए सभी 13 नक्सली हार्डकोर और वांछित कैडर थे। इन पर—

  • अलग-अलग राज्यों में हत्या

  • सुरक्षाबलों पर हमले

  • विस्फोट और लूट

जैसे गंभीर मामलों में कुल मिलाकर 4.49 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इनमें कुछ नक्सली लंबे समय से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय थे।

महिला नक्सली की भी पुष्टि

इस मुठभेड़ में एक महिला नक्सली के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महिला नक्सली संगठन में रणनीतिक और लॉजिस्टिक भूमिका निभा रही थी और कई ऑपरेशनों की योजना में शामिल रही थी। महिला नक्सलियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि माओवादी संगठन में महिलाओं को भी सक्रिय लड़ाकू भूमिका दी जाती रही है।

बरामद हुआ भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने—

  • अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार

  • इंसास और एसएलआर राइफल

  • विस्फोटक सामग्री

  • डेटोनेटर और गोला-बारूद

बरामद किया है। इससे स्पष्ट होता है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।

सुरक्षाबलों की रणनीति और साहस

इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय सटीक खुफिया जानकारी, बेहतर समन्वय और आधुनिक रणनीति को दिया जा रहा है। घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षाबलों ने—

  • इलाके की घेराबंदी

  • नक्सलियों के बच निकलने के रास्ते बंद

  • न्यूनतम नुकसान के साथ ऑपरेशन पूरा

कर यह साबित कर दिया कि अब नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाने तेजी से खत्म हो रहे हैं।

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में—

  • सुरक्षा अभियान

  • सड़क और संचार नेटवर्क

  • शिक्षा और रोजगार योजनाएँ

तेज़ की हैं। सारंडा ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद अब अंतिम दौर में पहुँच रहा है

विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने से नक्सली संगठन में—

  • मनोबल टूटेगा

  • नए कैडर की भर्ती कमजोर होगी

  • हिंसक घटनाओं में कमी आएगी

स्थानीय लोगों में राहत का माहौल

इस बड़ी कार्रवाई के बाद सारंडा और आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से नक्सली हिंसा, जबरन वसूली और डर के साए में जी रहे लोगों को अब सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

झारखंड के सारंडा में 13 इनामी नक्सलियों का ढेर होना नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर है। एक महिला नक्सली समेत 4.49 करोड़ के इनामी कैडर का सफाया यह संदेश देता है कि अब हिंसा और आतंक के लिए कोई जगह नहीं बची है

यह ऑपरेशन न केवल सुरक्षाबलों की बहादुरी और रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि झारखंड धीरे-धीरे नक्सल हिंसा से मुक्त भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

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