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21 Jan 2026, Wed

Lohri 2026 Date: 13 या 14 जनवरी? लोहड़ी की सही तारीख, पूजा का समय और शुभ मुहूर्त जानें

Lohri 2026 Date: 13 या 14 जनवरी? लोहड़ी की सही तारीख, पूजा का समय और शुभ मुहूर्त जानें

हर साल सर्दियों के अंत और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाने वाला लोहड़ी पर्व उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। जैसे-जैसे नया साल शुरू होता है, वैसे-वैसे लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है—Lohri 2026 की सही तारीख क्या है?
क्या लोहड़ी 13 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी या 14 जनवरी 2026 को? आइए इस भ्रम को पूरी तरह दूर करते हैं और जानते हैं लोहड़ी की सही तिथि, पूजा का शुभ समय और इस पर्व का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व


Lohri 2026 Date: लोहड़ी 13 या 14 जनवरी?

लोहड़ी को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इसी बात पर होता है कि इसे किस तारीख को मनाया जाए। दरअसल, लोहड़ी का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति) से जुड़ा होता है, लेकिन इसे संक्रांति से एक दिन पहले मनाने की परंपरा है।

लोहड़ी 2026 की सही तारीख

👉 मंगलवार, 13 जनवरी 2026

14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी, जबकि लोहड़ी हमेशा मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मनाई जाती है। इसलिए लोहड़ी 2026 में 13 जनवरी को ही मनाई जाएगी, न कि 14 जनवरी को।


लोहड़ी 2026 पूजा का सही समय और शुभ मुहूर्त

लोहड़ी का पर्व मुख्य रूप से संध्या और रात्रि काल में मनाया जाता है। इस दिन लोग सूर्य देव और अग्नि देव की पूजा करते हैं।

🔔 लोहड़ी पूजा का शुभ समय (अनुमानित)

  • पूजा का श्रेष्ठ समय: सूर्यास्त के बाद

  • अग्नि पूजन का समय: शाम 5:30 बजे से 8:30 बजे तक

  • विशेष ध्यान: सूर्यास्त के बाद ही अग्नि प्रज्वलन करना शुभ माना जाता है

इस समय में अग्नि के चारों ओर परिक्रमा कर तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और पॉपकॉर्न अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।


लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? जानें पर्व का महत्व

लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि कृषि, प्रकृति और जीवन के उत्सव का प्रतीक है। यह पर्व:

  • रबी फसल की बुआई पूर्ण होने की खुशी में

  • सूर्य देव के उत्तरायण होने की शुरुआत के रूप में

  • सर्द ऋतु के विदाई और बसंत के स्वागत के रूप में
    मनाया जाता है।

विशेष रूप से किसानों के लिए यह पर्व बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह अच्छी फसल और समृद्धि की कामना से जुड़ा है।


अग्नि पूजा का धार्मिक महत्व

लोहड़ी की रात जलाई जाने वाली अग्नि केवल अलाव नहीं होती, बल्कि इसे देवता का रूप माना जाता है। अग्नि में आहुति देने का अर्थ है—

  • नकारात्मकता और कष्टों का दहन

  • सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना

  • नए जीवन चक्र की शुरुआत

इसी कारण लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और पारंपरिक गीत गाते हैं।


लोहड़ी से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाज

लोहड़ी के दिन और रात कई पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं:

  • अलाव जलाकर तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली अर्पित करना

  • पारंपरिक पंजाबी गीत गाना

  • ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्धा

  • नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशु के लिए विशेष लोहड़ी

यह पर्व सामूहिक उत्सव और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।


लोहड़ी और मकर संक्रांति का संबंध

हालाँकि लोहड़ी और मकर संक्रांति अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं, लेकिन दोनों का खगोलीय आधार एक ही है—
👉 सूर्य का मकर राशि में प्रवेश

  • 13 जनवरी 2026: लोहड़ी

  • 14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति

इसी वजह से हर साल तारीख को लेकर भ्रम होता है, लेकिन परंपरा के अनुसार लोहड़ी हमेशा 13 जनवरी को ही मनाई जाती है।


लोहड़ी 2026 पर क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • सूर्यास्त के बाद ही अग्नि पूजन करें

  • पारंपरिक भोजन का सेवन करें

  • बुजुर्गों का आशीर्वाद लें

  • जरूरतमंदों को दान दें

❌ क्या न करें

  • दिन में लोहड़ी मनाने से बचें

  • नकारात्मक बातें या झगड़ा न करें

  • अग्नि का अपमान न करें


निष्कर्ष

अगर आप भी सोच रहे थे कि Lohri 2026 की तारीख 13 जनवरी है या 14 जनवरी, तो अब कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है।
👉 लोहड़ी 2026 मंगलवार, 13 जनवरी को ही मनाई जाएगी, जबकि 14 जनवरी को मकर संक्रांति होगी।

सही तिथि और शुभ समय पर लोहड़ी मनाने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस लोहड़ी पर अग्नि देव और सूर्य देव की कृपा से आपका जीवन खुशियों से भर जाए—यही कामना है।

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