प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ओमान दौरे के दौरान एक दिलचस्प बात ने लोगों का ध्यान खींचा। आधिकारिक बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री के कान में लगा एक खास इलेक्ट्रॉनिक गैजेट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों के मन में सवाल उठा—आखिर यह डिवाइस क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
असल में यह कोई नई या असामान्य चीज़ नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और उच्चस्तरीय बैठकों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला एक एडवांस्ड कम्युनिकेशन डिवाइस है, जिसे आम भाषा में ईयरपीस या ट्रांसलेशन ईयर गैजेट कहा जाता है।
क्या है पीएम मोदी के कान में दिखा गैजेट?
पीएम मोदी के कान में दिखा यह डिवाइस एक सिक्योर वायरलेस ईयरपीस होता है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है—
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रियल-टाइम अनुवाद (Live Translation)
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सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ी सूचनाएं
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टीम या दुभाषिये से तुरंत संवाद
जब प्रधानमंत्री किसी ऐसे देश में जाते हैं, जहां भाषा अलग होती है, तब इस तरह का गैजेट बेहद अहम भूमिका निभाता है।
यह ईयर गैजेट किस काम आता है?
1️⃣ रियल-टाइम ट्रांसलेशन
अंतरराष्ट्रीय बैठकों में नेता अलग-अलग भाषाओं में बात करते हैं। ऐसे में यह ईयरपीस—
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सामने वाले नेता या प्रतिनिधि की भाषा का
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तुरंत अनुवाद कर
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प्रधानमंत्री तक पहुंचाता है
इससे संवाद में देरी नहीं होती और बातचीत सहज बनी रहती है।
2️⃣ बिना बाधा के बातचीत
अगर अनुवादक अलग से माइक या स्पीकर के ज़रिये अनुवाद करे, तो बैठक का प्रवाह टूट सकता है। ईयर गैजेट की मदद से पीएम मोदी—
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सामने वाले वक्ता को सीधे सुनते हैं
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साथ ही कान में अनुवाद भी मिलता रहता है
इससे मीटिंग ज्यादा प्रभावी और गोपनीय रहती है।
3️⃣ सुरक्षा और प्रोटोकॉल अलर्ट
प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां भी इस डिवाइस के जरिए—
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समय-समय पर जरूरी अलर्ट
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कार्यक्रम में बदलाव
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सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं
तुरंत पहुंचा सकती हैं। यह सब बहुत डिस्क्रीट तरीके से होता है, ताकि कार्यक्रम पर कोई असर न पड़े।
ओमान दौरे में क्यों दिखा यह गैजेट?
ओमान की आधिकारिक भाषा अरबी है। हालांकि कई नेता अंग्रेज़ी में भी संवाद करते हैं, लेकिन—
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औपचारिक भाषण
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सांस्कृतिक कार्यक्रम
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स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत
के दौरान अरबी भाषा का प्रयोग स्वाभाविक है। ऐसे में पीएम मोदी के लिए यह ईयर गैजेट भाषाई सेतु (Language Bridge) का काम करता है।
क्या यह कोई नई तकनीक है?
नहीं। यह तकनीक कई वर्षों से—
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संयुक्त राष्ट्र (UN) बैठकों
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G20 शिखर सम्मेलन
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द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं
में इस्तेमाल की जा रही है। अमेरिका, यूरोप, एशिया समेत दुनिया के लगभग सभी बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस तरह के इंटरप्रेटेशन ईयरपीस का इस्तेमाल करते हैं।
क्या पीएम मोदी पहले भी ऐसा गैजेट इस्तेमाल कर चुके हैं?
हां। पीएम मोदी के—
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फ्रांस
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जापान
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रूस
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खाड़ी देशों
के दौरों के दौरान भी कई बार इस तरह का ईयरपीस देखा गया है। हालांकि यह अक्सर कैमरे की नजर में नहीं आता, इसलिए जब साफ दिखता है तो चर्चा का विषय बन जाता है।
सोशल मीडिया पर क्यों हुई चर्चा?
पीएम मोदी की हर गतिविधि पर देश-विदेश में नजर रहती है। जैसे ही ओमान दौरे की तस्वीरें सामने आईं—
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कुछ लोगों ने इसे हाई-टेक गैजेट बताया
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कुछ ने इसे स्वास्थ्य से जोड़कर कयास लगाए
हालांकि विशेषज्ञों और आधिकारिक सूत्रों ने साफ किया कि यह पूरी तरह सामान्य और प्रोफेशनल डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर किया जाता है।
भारत की कूटनीति में ऐसे गैजेट्स का महत्व
भारत आज वैश्विक मंच पर एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। ऐसे में—
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तेज़ और सटीक संवाद
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बिना भाषा बाधा के बातचीत
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संवेदनशील मुद्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया
बहुत जरूरी हो जाती है। यह ईयर गैजेट भारत की आधुनिक और प्रोफेशनल डिप्लोमैसी का एक छोटा लेकिन अहम हिस्सा है।
निष्कर्ष
ओमान दौरे के दौरान पीएम मोदी के कान में दिखा खास गैजेट कोई रहस्यमय डिवाइस नहीं, बल्कि रियल-टाइम अनुवाद और सुरक्षित संवाद के लिए इस्तेमाल होने वाला एक आधुनिक ईयरपीस है। यह डिवाइस दिखाता है कि आज की कूटनीति में तकनीक किस तरह संवाद को आसान, तेज़ और प्रभावी बना रही है।
भाषा की सीमाओं को तोड़कर संवाद स्थापित करना ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों की सबसे बड़ी ताकत है—और यही काम यह छोटा सा गैजेट बखूबी करता है।
