Putin India Visit : भारत–रूस सहयोग किसी के खिलाफ नहीं, पुतिन ने कहा – पढ़ें पूरा बयान
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इस दौरान दिए गए उनके बयान ने वैश्विक राजनीति और भारत–रूस संबंधों पर नई चर्चा भी छेड़ दी। एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और रूस का सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह केवल दोनों देशों के व्यापक राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत की रूस–ऊर्जा साझेदारी पर तीखा रुख अपना रहा है।
रूस–भारत व्यापार पर पश्चिमी दबाव का असर?
इंटरव्यू में जब पुतिन से पूछा गया कि क्या पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अमेरिका के दबाव के कारण भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद घटाई है, तो उन्होंने इस पर महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी।
पुतिन ने कहा:
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“साल 2025 के पहले नौ महीनों में भारत–रूस कुल व्यापार में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन ऊर्जा सहयोग काफी हद तक अप्रभावित है।”
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उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं और वैश्विक तेल बाजार में उसकी रणनीतिक भूमिका को देखते हुए कुछ देश भारत की बढ़ती ताकत से असहज हैं।
पुतिन के अनुसार, कुछ पश्चिमी समूह राजनीतिक कारणों से भारत के प्रभाव को कम करने और रूस–भारत साझेदारी में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह संबंध पारस्परिक विश्वास पर आधारित है और ऐसे दबावों से प्रभावित नहीं होंगे।
अमेरिका की सख्त नीति पर पुतिन की प्रतिक्रिया
रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा उस समय हो रही है जब भारत–अमेरिका संबंधों में तनाव दिखा है।
अमेरिका ने:
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भारतीय उत्पादों पर 50% तक आयात शुल्क लगाया है,
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और रूस से भारत द्वारा खरीदे जाने वाले कच्चे तेल पर 25% अतिरिक्त कर लगा दिया है।
यह कदम भारत के लिए आर्थिक चुनौती पैदा करता है, लेकिन पुतिन का कहना है कि यह रूस–भारत संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं डालता।
उन्होंने कहा:
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“बाहरी दबावों के बावजूद न मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भारत–रूस साझेदारी का उपयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ किया है।”
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“दोनों देशों का ध्यान केवल अपने हितों की रक्षा और पारस्परिक सहयोग पर केंद्रित है।”
“जब अमेरिका खुद रूसी ऊर्जा खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं?” – पुतिन
अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर दी जाने वाली चेतावनियों पर पुतिन ने एक सीधा सवाल उठाया:
“जब अमेरिका स्वयं अपने परमाणु संयंत्रों के लिए हमसे परमाणु ईंधन खरीदता है, तो भारत को ऐसा करने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए?”
यह टिप्पणी इस बात को उजागर करती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोहरे मानदंड किस हद तक मौजूद हैं। पुतिन ने कहा कि रूस भारत का विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार है और आगे भी रहेगा।
भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर पुतिन की प्रशंसा
रूसी राष्ट्रपति ने भारत की वैश्विक स्थिति और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दुनिया में एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में भारत की भूमिका बढ़ी है और रूस इस सहयोग को आगे और गहरा करना चाहता है।
पुतिन ने बताया:
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भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने वाला प्रमुख खिलाड़ी है।
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रूस–भारत संबंध आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और ऊर्जा—सभी क्षेत्रों में मजबूत हैं।
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भविष्य में भी दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा।
भारत–रूस संबंधों की स्थिरता क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और रूस दशकों से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। यह सहयोग इन कारणों से महत्वपूर्ण है:
1. ऊर्जा सुरक्षा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। ऐसे में रूस से सस्ता कच्चा तेल भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत देता है।
2. रक्षा सहयोग
रूस भारत के लिए वर्षों से प्रमुख रक्षा सप्लायर रहा है। S-400, ब्रह्मोस और अन्य प्रणाली इसी साझेदारी की नींव हैं।
3. भू-राजनीतिक संतुलन
रूस के साथ मजबूत संबंध भारत को वैश्विक कूटनीति में सामरिक संतुलन बनाए रखने की ताकत देते हैं।
अमेरिका के साथ मतभेद के बीच रूस–भारत रिश्ते और मजबूत?
अमेरिका द्वारा भारी आयात शुल्क लगाए जाने और रूस से तेल खरीद पर दबाव डालने के बावजूद, भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। पुतिन ने भी यही संदेश दिया कि:
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भारत और रूस दोनों अपनी साझेदारी को स्वतंत्र कूटनीति के आधार पर आगे बढ़ाते हैं।
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यह साझेदारी किसी ब्लॉक राजनीति का हिस्सा नहीं है।
निष्कर्ष
पुतिन की इस यात्रा और उनके बयान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि भारत–रूस संबंध बाहरी दबावों से संचालित नहीं होते। दोनों देश केवल अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
पुतिन का यह बयान कि “भारत और रूस का सहयोग किसी के खिलाफ नहीं है” आने वाले समय में वैश्विक शक्ति समीकरणों में भारत की स्वतंत्र भूमिका और रूस–भारत संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।
